अमेरिका के पश्चिमी न्यूयॉर्क में ब्रिटिश-अमेरिकी उपन्यासकार सलमान रुश्दी पर हुए हमले ने दुनिया को झकझोर दिया है। मुंबई में जन्मे सलमान रुश्दी पर ये हमला उनकी किताब "द सैटेनिक वर्सेज" को लेकर हुआ, बताया जा रहा है। उनके खिलाफ ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामनेई ने मौत का फतवा जारी किया था। इस फतवे को झेलने वाले रुश्दी ने कहा था- इस सूची में शामिल होना सम्मान की बात है। इस किताब के लिए 33 साल पहले मुंबई में उनका व्यापक विरोध हुआ था।
किताब "द सैटेनिक वर्सेज" के लेखक रुश्दी पर अभी भी चालीस लाख डॉलर का ईनाम है। पिछले सालों ईरान और पश्चिम के बीच रिश्तों के सामान्य होने के बावजूद इनाम की रकम बढ़ा दी गई थी। रुश्दी 12 साल तक ब्रिटिश एजेंटों की सुरक्षा में रहे हैं। 21वीं सदी में प्रवेश करने के साथ ही रुश्दी ब्रिटेन छोड़कर अमेरिका चले गए थे। 2002 से वे बिना किसी सुरक्षा के रहते हैं। सुरक्षाकर्मी उनके साथ तभी नजर आते हैं जब वह किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में होते हैं। शुक्रवार को न्यूयॉर्क में उनपर हुए हमले ने 33 साल पहले उनकी किताब और उनके विरोध में मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शन की याद ताजा कर दी है। रुश्दी के खिलाफ उनके जन्मस्थान मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शनों ने अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बटोरी थीं।
एक सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारी और एक पत्रकार ने 1989 में मुंबई में उनके खिलाफ हुए विरोध प्रदर्शन को याद करते हुए बताया कि 14 फरवरी, 1989 को रुश्दी की विवादास्पद पुस्तक "द सैटेनिक वर्सेज" के खिलाफ मुंबई पुलिस आयुक्त कार्यालय के पास व्यस्त इलाके में एक विरोध मार्च का आयोजन किया गया था। इस विरोध प्रदर्शन के दौरान दक्षिण मुंबई में क्रॉफर्ड मार्केट के पास प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग ने फायरिंग कर दी थी। इस फायरिंग में कम से कम 12 लोगों की मौत हो गई थी।
गौरतलब है कि अमेरिका के न्यूयॉर्क में एक कार्यक्रम के दौरान चाकूबाजी का शिकार हुए सलमान रुश्दी की हालत गंभीर बनी हुई है। रुश्दी के करीबियों ने कहा है कि इस हमले में उन्हें काफी चोटें आई हैं और उनकी एक आंख भी जा सकती है। इस बीच पुलिस ने रुश्दी पर हमला करने वाली की पहचान का खुलासा कर दिया है। बताया गया है कि हमलावर न्यू जर्सी का रहने वाला हादी मतार है। उसकी उम्र महज 24 साल है।







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