ओमप्रकाश तिवारी व राजेश राठी
अतिरिक्त आयुक्त (स्वास्थ्य) गीताली दुवारा ने आज लखीमपुर जिले के संयुक्त स्वास्थ्य सेवा निदेशक के कार्यालय में विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्घाटन किया । विश्व स्तनपान सप्ताह सन् 2022 के 1 अगस्त से 7 अगस्त तक चलेगा तथा इस वर्ष के विश्व स्तनपान सप्ताह का नारा निर्धारित किया गया है कि "स्तनपान के लिए कार्रवाई करें: सिखाए और समर्थन करे।"
आज विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर आयोजित इस कार्यक्रम में लखीमपुर जिले के महकमा चिकित्सा और स्वास्थ्य अधिकारी (मुख्य कार्यालय) डॉ क्वीन बरुआ ने बताया की सर्वप्रथम यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि बच्चे को जन्म से 6 महीने तक केवल माँ का दूध ही पिलाया जाए तथा 6 महीने के बाद बच्चे को स्तनपान के साथ-साथ नर्म, महीन संपूर्ण आहार देना शुरू कर देना चाहिए और उसके साथ साथ दो साल तक स्तनपान जारी भी रखना चाहिए। क्योंकि ऐसा करने पर बच्चा स्वस्थ रहता है और भविष्य में उस बच्चे की प्रतिरक्षा प्रणाली में भी सुधार होगा। उन्होने यह भी कहा कि मां के अच्छे स्वास्थ्य के लिए स्तनपान भी जरूरी है। डॉ. क्वीन बरौआ ने आशा कर्मी, एएनएम और उपस्थित लोगों के बीच स्तनपान और उसकी भ्रांतियों के बारे में सभा में व्याख्यान दिया। इतना ही नही उक्त सभा में एएनएम और आशा कर्मियों को यह भी बताया गया कि स्तनपान के समय मां के सामने आने वाली विभिन्न कठिनाइयों का इलाज किस प्रकार किया जाए । जिला स्वास्थ्य विभाग का दायित्व भार संभाल रही अतिरिक्त उपायुक्त गीताली दुबारा ने कहा की "स्तनपान बच्चों और माताओं के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। आज विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर, स्वास्थ्य विभाग स्तनपान और स्तनपान के लाभों के बारे में गलत धारणाओं के खिलाफ जागरूकता को बढ़ावा भी दिया गया। अतिरिक्त आयुक्त ने स्वास्थ्य विभाग को गर्भवती माताओं को उचित सलाह देने का निर्देशभी दिया। प्रसूति चिकित्सकों के साथ बैठक के दौरान स्तनपान के महत्व और आवश्यकता और राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के जिला मीडिया विशेषज्ञों को जिले के हर अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र में स्तनपान नीतियों को प्रदर्शित करने के लिए विशेष कदम उठाने का निर्देश दिया।उत्तर लखीमपुर सिविल जिला अस्पताल के अधीक्षक डॉ. गुनिन गोगोई ने अपने भाषण में कहा कि बच्चे के जन्म के एक घंटे के भीतर बच्चे और मां के त्वचा से त्वचा के संपर्क से होने वाले महत्व के बारे में बताया। डॉ. गुनिन गोगोई ने माताओं को बोतलबंद दूध, कृत्रिम निपल्स और पैसिफायर के उपयोग और इससे उत्पन होने वाले खतरों के बारे में ध्यान आकर्षित भी किया।आज के इस कार्यक्रम में अनुमंडल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (जन स्वास्थ्य) डॉ धीरेन सैकिया, अनुमंडल चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (विद्यालय स्वास्थ्य) डॉ अपर्णा दत्ता, जिला निरीक्षण अधिकारी डॉ शिल्पी सैकिया, जिला मलेरिया अधिकारी सी एस पेगु, स्वास्थ कर्मी, इत्यादि उपस्थित थे।







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