जन्मदिन पर हार्दिक बधाई
दर्द,, मुक्तक
दर्द सीने में नहीं कहीं भी हो सकता है
पीने से क्या, वैसे भी कम हो सकता है
बांटने से सकुन मिलता है देख तो सही
बिन बांटें ना पीए भी तो रह सकता है
इतने सीतम ढाये है तुने जमाने पर
गम भूलाने चल पड़ा पैमाने पर
ठहर जा अभी भी देर ना हुई
मत ढकेल खुद को कातिलखाने पर
गम भूलाना ही है तो रम जा राम में
छोड़ भटकन परिधि लग जा काम में
ईश्वर में लगाले तन मन इतना कि
भूलकर भी झूलना ना पङे जाम में
सुख दुःख कुछ नहीं सिर्फ अनुभूति है
यह कोई स्थायी नहीं इनकी १ गति है
भांप कर सहेज लेना ही बेहतर है
अगर उलझ गये, अंतोगत्वा दुर्गति है
दीन हीन मत बन ना ही गुमान कर
जो भी बिता भूल जा ना अपमान कर
बदलेगी स्थितियां धैर्य धर इंतजार कर
होगी तेरी वापसी ईश्वर का तू ध्यान धर
मदन सुमित्रा सिंघल
पत्रकार एवं साहित्यकार
शिलचर असम मो. 9435073653







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