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तीर्थ रक्षा के लिए जैन समाज का मौन जुलूस

 


गुवाहाटी। झारखंड के गिरिडीह जिले में स्थित जैन शाश्वत तीर्थ क्षेत्र श्री सम्मेद शिखरजी को झारखंड सरकार ने पर्यटन स्थल के रूप में घोषित करने के बाद पूरे देश में जैन समुदाय के बीच विरोध के स्वर मुखर होने लगे हैं। झारखंड सरकार के इस निर्णय का विरोध करने के लिए जैन समुदाय ने 21 दिसंबर को पूरे भारत में भारत बंद की घोषणा करते हुए सभी जैन धर्मावलंबी अपने व्यापारिक प्रतिष्ठान बंद करके मौन जुलूस के साथ सड़कों पर उतर गए। गुवाहाटी में गुवाहाटी जैन समाज ने प्रातः 8:30 बजे महावीर स्थल से विरोध प्रकट करते हुए मौन यात्रा निकाली और झारखंड सरकार से निर्णय को रद्द करने की मांग की। यह मौन यात्रा चार नंबर रेल गेट, ए टी रोड, तीन नंबर रेल गेट, एसआरसीबी रोड हेम बरुआ रोड, एमएस रोड होते हुए महावीर स्थल में समापन हुई। मौन यात्रा में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में हाथों में तख्तियां लेकर प्रदर्शन कर रही थी।इस अवसर पर दिगंबर जैन पंचायत के मंत्री वीरेंद्र सरावगी ने कहा कि सम्मेद शिखर तीर्थ जैन समुदाय को प्राणों से भी प्यारा तीर्थ है। यहां जैन धर्म के 24 तीर्थंकरो में से 20 तीर्थंकरों की मोक्ष स्थली है। हाल ही में झारखंड सरकार ने इस तीर्थ स्थान को एक पर्यटन स्थल के रूप में घोषित कर दिया है। जिसके चलते इस क्षेत्र में अनैतिक कार्यों को बढ़ावा मिलेगा एवं तीर्थ स्थान की गरिमा की हानि होगी। इसी के प्रतिवाद में जैन समाज ने संपूर्ण भारत में मौन जुलूस निकालकर अपनी नाराजगी जाहिर की है एवं झारखंड सरकार से अनुरोध किया है कि सम्मेद शिखर को पर्यटन स्थल न होकर जैन तीर्थ स्थल के रूप में ही बना रहे। इसके लिए असम के राज्यपाल के द्वारा भारत के प्रधानमंत्री और झारखंड सरकार को गुवाहाटी जैन समाज द्वारा ज्ञापन दिया गया। इस अवसर पर गुवाहाटी नगर निगम के पार्षद प्रमोद स्वामी और सौरभ झुंझुनूवाला ने कहा कि तीर्थ स्थल को पर्यटन स्थल के रूप में घोषणा करना झारखंड सरकार का फैसला है। किसी राज्य सरकार के फैसले को केंद्र सरकार अनुमोदना प्रदान करती है। फिर भी हम केंद्र सरकार के माध्यम से झारखंड सरकार से यह अनुरोध करेंगे कि वे अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करें ।ताकि जैन धर्म के लोगों की भावना व आस्था पर आघात ना हो। इस अवसर पर दिसपुर जैन समाज के मंत्री विनोद छाबड़ा ने भी झारखंड सरकार के इस निर्णय का पुरजोर विरोध करते हुए इस पर पुनर्विचार की मांग की।

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