गुवाहाटी। पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति की रजत जयंती वर्ष के उपलक्ष में आयोजित दो दिवसीय जनजाति संस्कृति महोत्सव में आज दूसरे दिन शंकरदेव कालाक्षेत्र के सभागार में आनंदमूर्ति गुरु मां ने अपने प्रवचन में भगवान शिव की व्याख्या करते हुए कहा कि गले में नाग धारण करने वाले शिव के तीन नेत्रों में एक नेत्र बंद रहता है। मनुष्य को भी तीन नेत्र प्राप्त है। लेकिन तीसरा नेत्र बाल्यकाल में स्वत ही बंद होकर लुप्त हो जाता है। इसके लिए बाल्यकाल में जब शिशु 5 वर्ष का हो उस समय योग साधना के द्वारा तीसरे नेत्र को जागृत रखा जा सकता है। शिव की उपासना के साथ-साथ स्वयं को शिव के स्वरूप में बदलने प्रयत्नशील रहना चाहिए। पश्चिमी सभ्यता के बारे में बोलते हुए गुरुमा ने कहा कि वैलेंटाइन डे पश्चिमी सभ्यता में इसलिए मान्यता है कि पश्चिम में प्यार नहीं होता है सिर्फ वासना ही होती है। अतः साल में एक दिन प्यार के लिए रखा जाता है। जो वैलेंटाइन नाम से जाना जाता है। लेकिन हमारी भारतीय संस्कृति में स्त्री पुरुष का प्यार सात जन्मो तक के लिए होता है। गुरु मां ने आगे कहा कि पैसा मनुष्य की आवश्यकता को पूरी कर सकता है लेकिन जीवन को शांति नहीं दे सकता। हमारे पास जो भी धन है इसका हमेशा सदुपयोग करना चाहिए। हमें शांति की खोज करनी चाहिए। इसके लिए हमें अपने संतों की ओर रुख करना होगा।इससे पहले आनंदमूर्ति गुरु मां ने दीप प्रज्वलित कर दूसरे दिन के कार्य का शुभारंभ किया। इस अवसर पर समारोह के स्वागताध्यक्ष रतन शर्मा ने फुलाम गमछा से गुरु मां का अभिनंदन किया। इसके पश्चात जनजाति समिति के अध्यक्ष बसंत अग्रवाल, आसाम महेश्वरी सेवा ट्रस्ट के अध्यक्ष भगवानदास दमानी, सचिव रमेश चांडक, महेश्वरी सभा के उपाध्यक्ष श्री बल्लभ लाहोटी, सचिव मदन सिग्ची, मारवाड़ी युवा मंच गुवाहाटी ग्रेटर शाखा के अध्यक्ष पंकज भूरा, नेडफी के महाप्रबंधक के अलावा उपस्थित विभिन्न राज्यों से आए जनजाति नेताओं ने गुरु मां का अंग वस्त्र से अभिनंदन किया। कार्यक्रम के दूसरे चरण में पूर्वोत्तर के सभी राज्यों से पधारे जनजाति प्रतिनिधियों ने अपने-अपने प्रांत के गीत नृत्य कला संस्कृति का प्रदर्शन किया।







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