कलश यात्रा श्री जैन मंदिर से कल्याण भवन तक गाजे बाजे के साथ निकाली गई जिसमे 108 महिलाओं ने कलश उठाया। इसके अलावा करीब 50 लोगों ने श्री कृष्ण ध्वजा उठाई। कलश यात्रा के दौरान संत श्री गोपाल दास जी महाराज साथ में चल रहे थे।
कलश यात्रा के पश्चात संत श्री गोपाल दास जी महाराज व्यास पीठ पर विराजमान हुए। आयोजक श्री गजानंद अग्रवाल ने महाराज श्री का हार पहनाकर अभिनन्दन किया। श्री गोपाल दास जी ने उपस्थित भक्तों को आज पुरुषोत्तम मास की एकादसी के अवसर पर कथा के पहले दिन भागवत महात्म के बारे में बताया।
उन्होंने कहा कि व्यक्ति किसी चीज की कमी से दुखी नहीं होते बल्कि किसी ख्वाहिश की गई वस्तु के ना मिलने से दुखी होते हैं। उन्होंने कहा कि हमारी बुद्धि मनुष्य की होनी चाहिए परंतु कान गाय के तरह बड़े होने चाहिए। महाराज जी ने बताया कि गया में श्राद्ध करने का भी उतना फल नहीं मिलता है जितना भागवत जी के श्रवण मात्र से मिलता है, परंतु मन से सुनना होता है।
आज की कथा का सभी श्रोताओं ने भरपूर आनंद लिया एवम महाराज जी को धन्यवाद दिया। आज की कथा का विश्राम अजीत जी द्वारा भजन प्रस्तुत एवम आरती के साथ हुआ। कलश यात्रा में श्रीमती अनिता भूत एवम सुनीता सिंघल का भरपूर सहयोग मिला। इसके अलावा श्री संजय सिंघल, कामाख्या सर्राफ, राजेंद्र गुप्ता, सुशील जालान, सुशील गोयल एवम बरपेटा से पधारे भैरू शर्मा का भी पूरा सहयोग मिला।








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