गुवाहाटी। श्री महावीर धर्मस्थल में चातुर्मासार्थ विराजमान आचार्य श्री प्रमुख सागर जी महाराज के सानिध्य में आयोजित क्षमा वाणी दिवस के उपलक्ष पर असम के मुख्यमंत्री डॉ हेमंत विश्व शर्मा ने अपने संबोधन में कहा हमारी यह जो पृथ्वी है यह पृथ्वी हमारा घर नहीं है , हम तो यहां आते हैं थोड़े दिन रहने के लिए और यही थोड़े दिनों में हमारा बीच में प्यार रहे, मोहब्बत रहे और हर कोई हर किसी के काम आए ऐसा सौहार्द संबंध बना रहे। आचार्य जी ने हमें परामर्श दिया, हमें कुछ आदेश दिया और इसका हम पालन करने की कोशिश करेंगे। हमारे लिए एक बहुत बड़ा दिन क्षमा वाणी के दिन आपके यहां रहा इसको एक बहुत गर्व का दिन महसूस कर रहा हूं कि आप असम जैसे प्रदेश में आए हैं और यहां अपने चातुर्मास किया । असम का सिचुएशन पहले हल्का-फुल्का था लेकिन अभी ठीक-ठाक है और आगे ठीक ही रहेगा धीरे-धीरे हमारा बीच में भाईचारा बनेगा और असम भी आगे जाएगा और हम लोग सब मिलकर असम प्रदेश को बड़ा बनाएंगे और यहां से ही हम एक भारत का विकास का भी एक लंबा इतिहास हम लोग लिखेंगे। यह मेरा विश्वास है आप यहां आए हमारा बीच में पधारे हम सब लोगों को अपने गौरवान्वित किया आशीर्वाद किया मैं आपको बहुत-बहुत धन्यवाद देता हूं। हम सब लोग से कुछ सेवा में कुछ कमी रहती है उस कमी के लिए हम आपसे क्षमा मांगते हैं। माननीय मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारे भारत में तीन महान धर्म की सूचना हुई कि सनातन हिंदू , बौद्ध और जैन धर्म हमारे भारत की महान भूमि से मानव समाज को मिला था और यह धर्म का ही एक बहुत बड़ा अवदान है जो जीवन को एक डिसिप्लिन तरीका से जीवन को आगे बढ़ाता है अपना आत्मा को शुद्ध करता है । उन्होंने कहा कि भगवान महावीर के २५५०वें निर्वाणोत्सव के उपलक्ष पर असम में भी अहिंसा वर्ष के रुप में मनाया जाएगा । इसके पूर्व में श्री महावीर धर्मस्थल में पंहुचने के साथ-साथ उनका भव्य रूप से स्वागत और अभिनंदन किया गया। मंच पर अध्यक्ष श्री महावीर जैन , चेयरमैन महावीर छाबडा और विशिष्ट समाजसेवी विजय कुमार चूड़ीवाल तथा श्री दिगंबर जैन महिला समिति के अध्यक्षा रतनप्रभा सेठी व रेखा बरजात्या ने परंपरागत रूप से उनका स्वागत किया। माननीय मुख्यमंत्री के मंच पर पधारने के साथ-साथ ही भगवान आदिनाथ का कलशाभिषेक देखा व उसके बाद विश्व शांति के लिए आचार्य श्री के मुखारविंद से शांति धारा का पाठ माननीय मुख्यमंत्री ने ध्यानपूर्वक सुना । आचार्य श्री ने मैं भी कहा कि श्री सूर्य पहाड़ पूर्वोत्तर का ऐसा पहाड़ है जहां पर हिंदुत्व का ९९९९९ शिवलिंग बने हुए हैं बस दो शिवलिंग और बनेगा तो अयोध्या जैसा तीर्थ बनेगा जहां पर सब धर्म के लोगों का आवागमन होगा तथा आदिनाथ भगवान की ३१ फीट की प्रतिमा लगाने से तीर्थ क्षेत्र का महत्व बढ़ जाएगा। मंत्री बीरेंद्र सरावगी के संचालन में आयोजित सभा में अध्यक्ष महावीर जैन ने स्वागत भाषण व रतनप्रभा सेठी ने क्षमावाणी के महत्व पर कविता पाठ किया।







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