गुवाहाटी। सकल विप्र समाज के सौजन्य से छत्रीबाडी स्थित परशुराम सेवा सदन (ब्राह्मण भवन) में पितृ पक्ष के उपलक्ष में श्रीमद् भागवत कथा सप्ताह का शुभारंभ आज कलश यात्रा से हुआ। इस अवसर पर प्रातः काल छत्रीबाडी स्थित श्याम मंदिर में 111 कलश की मुख्य यजमान कमल तिवारी ने पूजन कर भागवत पूजा की। व्यास गुरु पंडित दिनेश शर्मा ओझा अनूपगढ़ वाले ने कलश यात्रा का शुभारंभ किया। कलश यात्रा छत्रीबाडी,एटी रोड, आठ गांव होते हुए परशुराम सेवा सदन में समापन हुई ।मुख्य यजमान कमल तिवारी द्वारा भागवत को व्यास पीठ पर स्थापित कर पूजा अर्चना की गई। कलश यात्रा का संचालन बुआ जी भक्त मंडल की सदस्योंओ ने किया। इस अवसर पर प्रथम दिन व्यास गुरु पंडित दिनेश भाई ओझा में भागवत की रचना विषय प्रसंग पर बोलते हुए कहा कि भागवत की रचना से पहले वेदों की रचना हुई थी। वेद साक्षात् नारायण है। वेद हमारे धर्म का मूल है। वेदों में ऋग्वेद सबसे प्राचीन ग्रंथ है। ऋषियों ने बहुत साधना व मंथन करके इस ग्रंथ को लिखा है। वेदों के अर्थ को समझना बड़ा जटिल है। इसे बड़े-बड़े पंडित भी ठीक से अर्थ नहीं निकाल पाए।जब हमें वेद समझ नहीं आए तब हमारे मनीषीयों ने वेदों के तीन भाग कर कर अलग-अलग वेदों की रचना की। अथर्ववेद में केवल विज्ञान संबंधी ही ज्ञान भरा पड़ा है। इसके बाद भी जब वेद समझ में नहीं आए तो उपनिषदों को बड़ी सरल भाषा में हमारे ऋषि मुनियों ने रचना की। फिर उपसर्ग फिर स्मृतियां लिखी गई।अंत में भगवान नारायण ने द्वापर युग में वेदव्यास को जन्म देकर पुराणो की रचना कर 17 पुराण लिखे गए। इसके बाद महर्षि नारद ने व्यास जी को प्रेरणा देकर श्रीमद् भागवत की रचना कराई। श्रीमद् भागवत की रचना अनेक पुराण व ग्रन्थो के मंथन के पश्चात हुआ। जो आति ही सरल भाषा में रचित किया गया। कलयुग में इसी ग्रंथ को मोक्ष का मार्ग माना गया है।







कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें