गुवाहाटी. कुछ समय पहले कोई भी गायों और बैलों की बात नहीं करना चाहता था... पूरे भारत में सीमाओं पार उनकी तस्करी की जाती थी और उन्हें अधिकतर बांग्लादेश में कसाइयों और तस्करों को बेच दिया जाता था।सालों साल इस धंधे से अर्जित मिलियन डॉलर का काला धन आतंकवाद, हथियारों की तस्करी, नकली मुद्रा व्यापार और अन्य राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को वित्त पोषित करता था। ऊपर से लेकर नीचे तक किसी ने भी इस कड़ी को तोड़ने की हिम्मत नहीं की थी । टाइम्स ऑफ़ इंडिया की रिपोर्ट (3 अक्टूबर, 2008) के अनुसार, हरकत-उल जिहाद अल इस्लामी (हूजी) कैडर अज़ीज़ुर रहमान सरदार ने पशु तस्कर होने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल के आतंकवादी समूहों के लिए हथियारों और गोला-बारूद की तस्करी करने की बात कबूल की।उसी वर्ष, पर्यावरण और वन मंत्रालय के पशु कल्याण विभाग ने गृह मंत्रालय को एक पत्र लिखकर पशु तस्करी से प्राप्त धन का उपयोग भारत में सक्रिय आतंकवादी संगठनों और उनके स्लीपर सेल को वित्त पोषित करने के लिए किए जाने की संभावना बताई।अप्रैल 2013 में टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट (12 अप्रैल, 2013) के अनुसार, हिज्ब-उल मुजाहिदीन (एचयूएम) को वित्त पोषित करने के लिए नकली मुद्रा की तस्करी के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा आरोप पत्र दायर किए गए लोगों में शफीक-उल (बांग्लादेश) और बादल शेख (पश्चिम बंगाल) मवेशी तस्करी में शामिल थे।
तब सुप्रीम कोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसले में सीमा शुल्क विभाग द्वारा सीमावर्ती क्षेत्रों में तस्करी किए गए मवेशियों की नीलामी को समाप्त कर दिया। लेकिन इससे बीएसएफ के सामने बचाए गए मवेशियों के निपटान की समस्या खड़ी हो गयी। जब कोई भी अन्य संगठन रेस्क्यू किये हुए गोवंश के पुनर्वास के लिए सामने नहीं आया, तब नवंबर 2018 में, बीएसएफ ने ध्यान फाउंडेशन से संपर्क किया और उनसे इन पशुओं के पुनर्वास का अनुरोध किया।
ध्यान फाउंडेशन की प्रेरणा स्रोत अश्विनी गुरुजी कहते हैं, कि,हम ‘ कमजोर और जरूरतमंदों से अपना मुंह नहीं मोड़ सकते’ और इसी वाक्य का अनुसरण करते हुए पांच साल की छोटी सी अवधि में ध्यान फाउंडेशन ने त्रिपुरा, असम, पश्चिम बंगाल, बिहार सहित दूरदराज के इलाकों में 70000 से अधिक बचाए गए गायों और बैलों के लिए 45 से अधिक गौशालाएं स्थापित की हैं।इस कार्य से निर्दोष लोगों के जीवन की रक्षा हुई,10000 से अधिक आदिवासियों और ग्रामीण लोगों को ( अधिकांश महिलाएं ) रोजगार प्राप्त हुआ, तथा गाय के खाद और पारंपरिक खेती के तरीकों का उपयोग करके सैकड़ों वर्ग किलोमीटर बंजर भूमि पुनः जीवित हो उठी। ध्यान फाउंडेशन की दृढ़ता के परिणामस्वरूप पशु कल्याण के पक्ष में कई मजबूत फैसले आए हैं, जिसमें तस्करी किए गए पशुओं के लिए तस्करों और वाहन मालिकों को जिम्मेदार ठहराया गया है।
.”बीएसएफ के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के डीआईजी अमरेश कुमार आर्य के अनुसार, ''ध्यान फाउंडेशन द्वारा पशुओं के पुनर्वास के कारण, नीलामी के माध्यम से पुनः तस्करी किए जाने वाले मवेशियों का स्मगलिंग चक्र टूट गया है और तस्करों द्वारा जवानों पर होने वाले हमलों में 70 प्रतिशत की भारी गिरावट आई है।”
बीएसएफ, ईस्टर्न कमांड के डीआईजी (आई) एस एस गुलेरिया के अनुसार, "ध्यान फाउंडेशन एकमात्र संगठन है, जो भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है और पशुओं की अवैध तस्करी और स्मगलिंग को रोकने में हमारी मदद कर रहा है।"
“ हफ़्तों तक भूखे - प्यासे, टूटे हुए अंगों और गंभीर बीमारियों से ग्रस्त यह जीव अत्यधिक दयनीय स्थिति में हमारी गौशालाओं में आते हैं और उनकी देखभाल करने में हम कोई कसर नही छोड़ते !
हमारे प्रयासों से तस्करी और अवैध रूप से वध किए जाने वाले गौवंश की संख्या में तो कमी आ रही है किन्तु हमारी गौशालाओं में उनकी संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है और साथ ही हमारे खर्च भी,” ध्यान फाउंडेशन की स्वयंसेविका गायत्री जी ने साझा किया, जिन्होंने व्यवसाय छोड़कर अपना जीवन ध्यान फाउंडेशन की धुबडी,गोहपुर,गुवाहाटी और सिलचर की गौशालाओं में बचाए गए करीब 3500 गोवंश की सेवा में समर्पित कर दिया।
ध्यान फाउंडेशन, 2010 से बीमार, घायल, छोड़े हुए, अनाथ एवं तस्करों से बचाए गए गौवंश और अन्य पशुओं जैसे कुत्ते, बिल्ली,बकरी,घोड़े,खच्चर आदि को बचाने और उनके पालन-पोषण के लिए कार्य कर रहा है।फाउंडेशन के स्वयंसेवकों और गौशालाओं पर पशु माफिया के गुंडों द्वारा बार-बार हमला किया गया और उन्हें झूठे मामलों में फंसाने और झूठी मीडिया रिपोर्टों और भ्रष्ट अधिकारियों के माध्यम से उन्हें बदनाम करने की भी कोशिश की है, लेकिन इन सबकी परवाह किए बगैर ध्यान फाउंडेशन निरन्तर इस सेवा कार्य में जुटा हुआ है।









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