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मारवाड़ी सम्मेलन के प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल से मुलाकात की

 


गुवाहाटी। पूर्वोत्तर प्रदेशीय मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा ,प्रांतीय महामंत्री विनोद लोहिया के नेतृत्व में सम्मेलन की कामरूप शाखा का एक प्रतिनिधिमंडल ने असम के राज्यपाल गुलाबचंद कटारिया से राजभवन में मुलाकात की। इस अवसर पर कामरूप शाखा के अध्यक्ष दिनेश गुप्ता, संस्थापक अध्यक्ष संपत मिश्र, राजस्थानी भाषा सुरक्षा समिति के संयोजक संदीप चमडिया उपस्थित थे। प्रतिनिधि मंडल ने राज्यपाल को ज्ञापन सौंपते हुए राजस्थानी भाषा को संविधान की आठवीं सूची में शामिल कर मान्यता देने की अपनी मांग को दोहराया। राज्यपाल महोदय ने अनुरोध को स्वीकार कर उसे केंद्र सरकार तक भेजने का आश्वासन देते हुए कहा कि राजस्थान विधानसभा में इस विषय पर दो बार प्रस्वाव गृहित किया जा चुका है।मगर भाषाई क्षेत्र के विवाद के चलते प्रस्ताव को केंद्र सरकार ने लंबित कर दिया। फिर भी इस मांग का सिलसिला अभी तक जारी है। सम्मेलन के प्रतिनिधि मंडल ने राजस्थानी भाषा को राजस्थान की राजकीय भाषा बनने पर भी अपनी मांग पर जोर दिया। प्रतिनिधि मंडल से राज्यपाल ने अन्य मुद्दों पर भी विचार विमर्श करते हुए कई उपयोगी सुझाव सम्मेलन प्रतिनिधि मंडल को दिए। राज्यपाल ने कहा कि राजस्थानी भाषा की मान्यता के लिए प्रवासी राजस्थानियों के बजाय यह आवाज राजस्थान क्षेत्र के अंदर से ही उठे तो काफी कारगर साबित होगी। इसके लिए मारवाड़ी सम्मेलन को राजस्थान में आंदोलन के रूप में कोई ठोस कदम उठाना होगा। सम्मेलन के कार्यों की सराहना करते हुए राज्यपाल ने सुझाव देते हुये कहा कि असम में वित्तीय सहायता के लिए महिला बैंक की स्थापना की जानी चाहिए ताकि व्यवसाय व रोजगार के क्षेत्र में वित्तीय सहायता प्राप्त हो सके। पूर्वोत्तर के विभिन्न क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के कोचिंग सेंटर की स्थापना की जानी चाहिए ताकि उसके सहयोग से हमारे समाज के युवक युवतियों उच्च शिक्षा प्राप्त कर स्वयं अपने पैरों पर खड़े हो सके। मारवाड़ी समाज को व्यवसाय और सामाजिक कार्यों के अलावा प्रशासनिक क्षेत्र में भी अपने पांव जमाने चाहिए। जिसके लिए कोचिंग सेंटरों के माध्यम से प्रशासनिक शिक्षा में सहयोग किया जा सकता है। युवतियों के लिए छात्रावास की स्थापना पर भी सम्मेलन को आगे आकर छात्रावास स्थापना को प्राथमिकता देनी चाहिए। असम से राजस्थान के लिए दैनिक ट्रेन ना होने की वजह से प्रवासियों को राजस्थान पहुंचने के लिए साप्ताहिक ट्रेनों के लिए काफी इंतजार करना पड़ता हैहजिसमें आने जाने के लिए समय भी काफी लग जाता है। अतः असम से राजस्थान के लिए दैनिक ट्रेन की मांग आवश्यक है। राज्यपाल ने सम्मेलन प्रतिनिधि मंडल को उनके कार्यों को संपादित करने के लिए हर प्रकार से सहयोग देने का आश्वासन दिया।

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