गुवाहाटी। गुवाहाटी उच्च न्यायालय के अधिवक्त श्री संदीप चमड़ीया ने जनहित याचिका नंबर 68/2023 में बरपेटा सत्र समूह मे में चले आ रहे, महिला का प्रवेश निषिद्धकरण के विरोध में एक जनहित याचिका दायर की है। इस याचिका में मुख्य रूप से यह मुद्दा उठाया गया है कि माननीय उच्चतम न्यायालय में सबरीमाला केस, 2018 में अपनी निर्णय के द्वारा जो महिलाओं के ऊपर निषिद्धकरण था उसे गैर संवैधानिक करार दिया गया है और यह कहा गया है कि कोई भी कार्य है जो महिला को और पुरुष के बीच में अंतर लाता है , वह असंविधानिक है।
ईस जनहित याचिका में श्री संदीप चमड़ीया ने यह कहा है की बरपेटा सत्र में जो बरसों से चली आ रही परंपरा , जहां महिलाओं को कीर्तन घर और मनी मुकुट में प्रवेश से निषिद्धकरण किया गया है, वह गैरकानूनी है और यह भारतीय संविधान के विभिन्न अनुच्छेदों का भी एक सीधा-सीधा उल्लंघन है।
गुवाहाटी उच्च न्यायालय की दो न्यायाधीश की विचार पीठ ने श्री संदीप चिमडीया की सभी युक्तियों को सुनते हुए और साथ-साथ में असम सरकार के अधिवक्ताओं का भी वर्णन सुनते हुए, अंत में इस जनहित याचिका को ग्रहण करते हुए, बरपेटा सत्र के समिति समूह को तथा असम सरकार को नोटिस जारी किया है और उनसे जवाब तलब किया है। यह जनहित याचिका चार सप्ताह बाद गुवाहाटी उच्च न्यायालय में पुन सुनी जाएगी।













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