जन्मदिवस पर हार्दिक बधाई
आशीर्वाद दाता:
पिता-माता
मदन - सुमित्रा सिंघल
जीजाजी - दीदी
बीनित - प्रीति अग्रवाल
भानजी
हीया व लव्या अग्रवाल
भाई-भाभी
कपिल - राशिका सिंघल
दो कुटंबों की शान है बेटी इसलिए हर क्षण मातृशक्ति का सम्मान होना चाहिए
वैसे तो शास्त्रों में बेटी को ही नहीं बल्कि हर महिला को देवी स्वरुपा मानकर उनके अधिकार एवं क्षेत्र में फलने फुलने देना चाहिए। आज बेटियों को चार दिवारी एवं पहरेदारी में रखना संभव भी नहीं। बचपन में ही स्कूल कालेज युनिवर्सिटी में पढ़ने के लिए जाना होता है ऐसे में अपनी संतान पर भरोसा करना पङता है। फिर करियर बनाने के लिए भी अवश्य अवसर देना चाहिए।
कुछ बच्चे भटक जाते हैं उन्हें सही मार्ग पर लाया जा सकता है लेकिन बच्चों को भी अपने माँ बाप परिवार एवं समाज के मान सम्मान में कहीं कोई आंच आने नहीं देना चाहिए।
बेटी अपने जन्म देने वाले कुल का नाम रोशन करने के साथ साथ आत्मनिर्भर बनकर यथाशक्ति परिवार,समाज एवं देश के लिए बहुत कुछ कर सकती हैं लेकिन वो संस्कार एवं परिवेश उसे मिला हो।
शादी के बाद ससुराल में जाकर उसको भी अपनी क्षमता एवं सेवा से स्वर्ग बना सकती है इसलिए कहा गया है दो कुटंबों की शान है बेटी।
आज देश की बेटियां हर क्षेत्र में आन बान शान के साथ शिखर में परचम लहरा रही है। इसमें दोनों कुटंबों का भी बराबर सहयोग समर्थन मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद मिलना चाहिए। चोका चुल्हा सम्भालने परिवार के हर सदस्य के साथ आत्मीयता के साथ व्यवहार करते हुए आर्थिक समर्थन भी बहुत बङा काम है। कामकाजी बहूओं को बेटी ही नहीं बल्कि बेटा मानकर दोनों कुटंबों को विशेष खयाल रखना चाहिए।
मदन सुमित्रा सिंघल
पत्रकार एवं साहित्यकार
शिलचर असम
मो 9435073653












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