गुवाहाटी। आठगांव स्थित मारवाड़ी हॉस्पिटल के सभागार में मारवाड़ी हॉस्पिटल, सीएमई फाउंडेशन ऑफ़ इंडिया ओर डायबिटीज सोसाइटी ऑफ़ इंडिया के संयुक्त तत्वाधान में हॉस्पिटल के कर्मचारी, नर्स आदि के लिए मधुमेह समस्या से पांव में होने वाले विकार के निदान के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें नगर के वरिष्ठ चिकित्सक भारत भूषण कुकरेजा, मारवाड़ी हॉस्पिटल के वरिष्ठ मधुमेह विशेषज्ञ डॉक्टर दिनेश अग्रवाल तथा मधुमेह समस्या के निवारण के विशेषज्ञ डॉक्टर सुधीर कुमार जैन ने कार्यशाला में चिकित्सा संबंधी प्रशिक्षण दिया। डॉ दिनेश अग्रवाल ने मधुमेह से पांव में होने वाले विकार पर व्याख्यान देते हुए कहा कि भारत मधुमेह की राजधानी है और हर 20 सेकंड में मधुमेह विकार के कारण एक पांव को काटना पड़ता है। इसकी जानकारी डॉक्टर, नर्स, रोगी और जनता जनार्दन को बहुत कम होती है। अतः इसके बारे में आज जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया है। जिसमें हॉस्पिटल के नर्स एवं चिकित्सा संबंधी जुड़े हुए कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस कार्यशाला में हर एक सेकंड में कटने वाले पांव को बचाने की मुहिम चलाई गई है। हमारे पांव के अंदर 24 हड्डी, 26 जॉइंट और 44 मांसपेशियां है। रोगी के शरीर व पांव में विकार उत्पन्न होने पर मधुमेह के चलते इन हड्डियों, जॉइंट और मांसपेशियों में दर्द की अनुभूति नहीं होती। जिसके कारण समस्या बढ़ती ही चली जाती है और अंत में पांव को काटना पड़ता है। इसके लिए पांव की नियमित जांच व देखभाल जरूरी है। डॉक्टर भारत भूषण कुकरेजा ने कहा कि किसी भी मधुमेह है रोगी को जीवन में 50% आशंका डायबिटीज के चलते पांव कटने की रहती है। रोगी को अपने पांव की सुरक्षा में विशेष ध्यान देना चाहिए। जैसे कैसे जूते पहने, कैसे नाखून को साफ रखना है ,उंगलियों के बीच के मेल को कैसे साफ किया जाए तथा अपनी चाल को कैसे रखनी है, तथा समय-समय पर शरीर की चमड़ी के ऊपर औषधिय लेप लगाते रहना चाहिए ताकि उनके पांव नरम रहे। डॉक्टर सुधीर जैन ने कहा कि मधुमेह से पांव के विकार की समस्या आज इतनी जटिल हो गई है कि रोगी के पांव की दुर्दशा हो जाती है। मधुमेह रोगी को न्यूरोपैथी हो जाती है। जिससे पांव का सूनापन कहा जाता है। जिसके चलते साधारण चोट भी गंभीर परिणाम दे देती है। कारण न्यूरोपैथी में सहयोगी को किसी भी दर्द की अनुमति नहीं होती है। अतः छोटी सी चोट अंदर ही अंदर बढ़कर भयंकर रोग बन जाती है। और अंत में सेफ्टीक का रूप धारण कर लेती है। जिसके चलते पांव को काटना पड़ता है। आज के कार्यक्रम में अस्पताल के चिकित्सा निदेशक जेपी शर्मा के अलावा अन्य कई पदाधिकारी भी उपस्थित थे।
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