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प्रेमचंद जयंती पर साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन

 


गुवाहाटी। “कथा सम्राट” मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर श्री मारवाड़ी हिन्दी पुस्तकालय के तत्वावधान में कमला पोद्दार सभागार में एक साहित्यिक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह अवसर न केवल प्रेमचंद की कालजयी रचनाओं को स्मरण करने का था, बल्कि उनके विचारों और चरित्रों के वर्तमान परिदृश्य पर विमर्श करने का भी रहा।


सर्वप्रथम सभी वक्ताओं को मंचासीन कराया गया। तत्पश्चात दीप प्रज्वलित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई।सभी अतिथियों का सम्मान फ़ुलम गामोसा व उपहार दे कर किया गया। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संयोजक पुष्पा सोनी ने सर्वप्रथम अध्यक्ष विनोद रिंगानिया को आमन्त्रित किया जिन्होंने प्रेमचंद को साहित्य का युग-प्रवर्तक बताते हुए कहा उनके जीवन दर्शन पर प्रकाश डाला।श्रीमती अंशु सारडा ने प्रेमचंद की स्त्री-पात्रों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “होरी की धनिया हो या ‘निर्मला’, प्रेमचंद की नायिकाएँ सहनशीलता की प्रतिमूर्ति होते हुए भी भीतर से बहुत मज़बूत हैं।वरिष्ठ साहित्यकार श्री ओंकार केडिया ने प्रेमचंद की भाषा और दृष्टिकोण पर बोलते हुए कहा -वो पहले लेखक थे, जो किसान की आत्मा को समझते थे। ‘गोदान’ और ‘कफ़न’ जैसी कहानियाँ भारतीय यथार्थ की पराकाष्ठा हैं।मुख्य अतिथि के रूप में युवा वक्ता सुश्री कविता कर्मकार ने प्रेमचंद की पीढ़ियों से संवाद करने की क्षमता को रेखांकित करते हुए उनकी कहानियों व उपन्यासों के कुछ उद्धरण रखे।अंत में सह संयोजक सरोज जालान ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम में सचिव सिद्धार्थ नवलगढ़िया,सविता जोशी, लक्ष्मीपत बैद, सन्तोष बैद, पुस्तकालय ट्रस्ट के मैनेजिंग ट्रस्टी नारायण खाकोलिया ,जीवराज जैन किशन जालान आदि के साथ अन्य दर्शकों की उत्साही भागीदारी रही।


श्री मारवाड़ी हिन्दी पुस्तकालय इस आयोजन के माध्यम से प्रेमचंद के साहित्य को पुनः जन-जन तक पहुँचाने की दिशा में एक विनम्र प्रयास कर रहा है।

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