लखीमपुर मे मारवाड़ी समाज द्वारा आयोजित सामूहिक श्रद्धांजलि सभा में विभिन्न दल संगठनों ने जुबीन गर्ग को श्रद्धांजलि दी एवम मौन जुलूस निकाला गया।
लखीमपुर से राजेश राठी की रिपोर्ट के अनुसार असम के गौरव, बहुमुखी प्रतिभा से संपन्न, जनप्रिय गायक, संगीतकार, अभिनेता और सामाजिक चेतना के संवाहक जुबिन गर्ग के असामयिक निधन की खबर ने पूरे असम ही नहीं, बल्कि सम्पूर्ण भारतवर्ष को शोकसंतप्त कर दिया। उनके निधन से असमिया संगीत और कला जगत पर ऐसा आघात लगा है जिसकी भरपाई संभव नहीं। वे केवल एक कलाकार नहीं, बल्कि असम की संस्कृति, लोकचेतना और जनभावनाओं के जीवंत प्रतीक थे।इसी शोक की घड़ी में शनिवार, 20 सितम्बर 2025 को लखीमपुर मारवाड़ी समाज के तत्वावधान में श्री श्री सीतारामजी ठाकुरबाड़ी मंदिर परिसर में एक भव्य सामूहिक श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया। सभा की शुरुआत जुबिन गर्ग की तस्वीर पर दीप प्रज्वलन और पुष्पांजलि अर्पण के साथ हुई। उपस्थित समाजजनों और संगठनों के प्रतिनिधियों ने गहन मौन साधकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। श्रद्धांजलि सभा के उपरांत नगर में एक मौन जुलूस भी निकाला गया, जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। यह जुलूस नगर के मुख्य मार्गों से होता हुआ मालपानी चाराली तक पहुंचकर संपन्न हुआ। पूरा नगर इस दौरान शोकमग्न दिखाई दिया और वातावरण ‘जुबिन दा अमर रहो’ के स्वर से गूंजता रहा। इस अवसर पर चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष रामेश्वर तापड़िया, मारवाड़ी सम्मेलन के अध्यक्ष नरेश दिनोदिया, ताई असम महिला परिषद की केंद्रीय अध्यक्ष मंदिरा चांगमाई, हिंदू युवा छात्र परिषद के पूर्व केंद्रीय अध्यक्ष माधव दास, JAFA के अध्यक्ष कुशल सैकिया, मानव अधिकार संग्राम समिति के केंद्रीय सचिव एवं पत्रकार राजू सिंघा, TYPA के उदित फूकन, समाजसेवी इंदरचंद जैन सहित अनेक संगठन प्रमुखों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और जुबिन गर्ग के योगदान को नमन किया। श्रद्धांजलि सभा के साथ ही लखीमपुर का बाजार दिनभर स्वेच्छा से बंद रहा। विभिन्न स्थानों पर संगठनों और नागरिकों ने अलग-अलग तरीके से उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। वहीं लखीमपुर सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय के खेलपथार में भी असंख्य लोग एकत्रित हुए और सामूहिक रूप से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। जुबिन गर्ग का जाना न केवल एक महान कलाकार का जाना है, बल्कि समाज की आत्मा का एक हिस्सा खो जाने जैसा है। उनके गीत, उनकी आवाज़ और उनका व्यक्तित्व आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनकर अमर रहेंगे। असम की संस्कृति और संगीत के इतिहास में उनका नाम सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा।







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