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“दीपावली को आस्था का पर्व बनाएं, उत्सव का नहीं” लखीमपुर मारवाड़ी समाज ने इस वर्ष दीपावली मिलन समारोह न करने का लिया सर्वसम्मत निर्णय



ओमप्रकाश तिवारी और राजेश राठी 

लखीमपुर। दीपों का पर्व इस वर्ष लखीमपुर में केवल प्रकाश का नहीं, बल्कि संवेदना और श्रद्धा का प्रतीक बनेगा। मारवाड़ी सम्मेलन लखीमपुर शाखा, मारवाड़ी सम्मेलन महिला शाखा, लखीमपुर मारवाड़ी युवा मंच तथा मारवाड़ी युवा मंच प्रगति शाखा — इन चारों संगठनों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस वर्ष 26 अक्टूबर को प्रस्तावित दीपावली मिलन समारोह आयोजित नहीं किया जाएगा। यह निर्णय समाज की गहरी भावनात्मक प्रतिक्रिया है — असम की आत्मा और संगीत सम्राट स्वर्गीय जुबीन गर्ग के असामयिक एवं रहस्यमयी निधन पर। लखीमपुर का पूरा मारवाड़ी समाज असम की जनता के साथ इस शोक की घड़ी में खड़ा है और इसीलिए समाज ने तय किया है कि इस बार दीपावली सादगी, संयम और आस्था के साथ मनाई जाएगी।सम्मेलन ने स्पष्ट अपील की है कि समाज के किसी भी कोने में आतिशबाज़ी, शोर-शराबे या भव्य आयोजनों का प्रदर्शन न किया जाए। पदाधिकारियों ने कहा कि जब राज्य भर में शोक और असम की धरती अपने प्रिय पुत्र के विलाप में डूबी है, तब आसमान में पटाखों की आवाज़ नहीं, बल्कि श्रद्धा के दीपों की मूक ज्योति ही हमारी सच्ची भावनाओं को व्यक्त करेगी। उन्होंने कहा —“इस दीपावली पर यदि कोई दीप जलाना है, तो वह आस्था का दीप हो; और यदि कोई शोर करना है, तो वह अन्याय के विरुद्ध आवाज़ उठाने का शोर हो — पटाखों का नहीं।” चारों संगठनों ने यह भी कहा कि दीपावली का असली अर्थ ‘अंधकार पर प्रकाश की विजय’ है, और इस समय सबसे बड़ा अंधकार है — सच्चाई पर पर्दा डालने का प्रयास। अतः समाज की यह ज़िम्मेदारी है कि वह शोर से नहीं, बल्कि शांति और श्रद्धा से अपना विरोध और एकता प्रदर्शित करे। इसी क्रम में समाज ने राज्य सरकार से भी दृढ़ मांग की है कि स्वर्गीय जुबीन गर्ग की मृत्यु की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच शीघ्र पूरी की जाए तथा इस प्रकरण से जुड़े सभी अपराधियों और साज़िशकर्ताओं को कठोरतम दंड दिया जाए। मारवाड़ी सम्मेलन ने सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) तथा माननीय उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में बनी जांच आयोग का स्वागत करते हुए कहा कि “जुबीन दा” को न्याय दिलाना असम के प्रत्येक नागरिक की नैतिक जिम्मेदारी है। सम्मेलन के प्रतिनिधियों ने समाज के सभी बंधुओं और नागरिकों से आग्रह किया कि इस वर्ष दीपावली को उत्सव नहीं, भक्ति, श्रद्धा और आत्मचिंतन का अवसर बनाया जाए। उन्होंने कहा — “हमारे दीप जलें, पर पटाखे न फूटें; क्योंकि इस बार की दीपावली आनंद की नहीं, आस्था की होगी।” कार्यक्रम संयोजक राजेश राठी ने कहा कि समाज का यह निर्णय केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि एक सामाजिक संदेश है कि जब तक न्याय अधूरा है, तब तक उल्लास अधूरा है। उन्होंने कहा कि लखीमपुर मारवाड़ी समाज हमेशा से अपनी संवेदनशीलता, अनुशासन और एकता के लिए जाना जाता है, और इस बार की दीपावली भी उसी परंपरा की मिसाल बनेगी।

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