फरीदाबाद से सामने आई यह घटना हर माता-पिता को झकझोर देने वाली है। यहां एक चार साल की बच्ची की जान सिर्फ इसलिए चली गई क्योंकि वह 50 तक गिनती नहीं लिख पाई। यह मामला सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि आज के समय में बच्चों पर बढ़ते दबाव और गुस्से में लिए गए गलत फैसलों की खतरनाक तस्वीर दिखाता है।
बुधवार की शाम थी। झाड़सेंतली गांव में किराए के मकान में रहने वाला कृष्णा जैसवाल अपनी चार साल की बेटी वंशिका को पढ़ा रहा था। बच्ची नर्सरी क्लास में पढ़ती थी। पिता ने उससे 50 तक गिनती लिखने को कहा। वंशिका ऐसा नहीं कर पाई। यहीं से कहानी ने खौफनाक मोड़ ले लिया।
बताया जा रहा है कि गिनती न लिख पाने पर पिता को इतना गुस्सा आया कि उसने बच्ची को बेलन से पीटना शुरू कर दिया। मासूम दर्द से रोती रही, लेकिन गुस्सा थमा नहीं। इसके बाद आरोपी ने बच्ची को जोर से फर्श पर पटक दिया। सिर के बल गिरने से वंशिका को गंभीर चोट लगी और वह बेहोश हो गई। घटना के बाद आरोपी पिता ही बच्ची को अस्पताल लेकर गया। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने वंशिका को मृत घोषित कर दिया। इस खबर ने अस्पताल स्टाफ और पुलिस दोनों को स्तब्ध कर दिया।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान 31 वर्षीय कृष्णा जैसवाल के रूप में हुई है, जो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले का रहने वाला है। वह फरीदाबाद में मजदूरी करता था। पत्नी दिन में काम पर जाती है और आरोपी की ड्यूटी रात में रहती थी। शुक्रवार को पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
परिवार में मृत बच्ची के अलावा सात साल का एक बेटा और दो साल की एक और बेटी है। इस तरह के मामलों में आरोपी पर हत्या और बाल उत्पीड़न की गंभीर धाराएं लगाई जाती हैं। अगर आरोप साबित होते हैं, तो आरोपी को लंबी सजा हो सकती है। फरीदाबाद की यह घटना सिर्फ एक परिवार की त्रासदी नहीं है, बल्कि पूरे समाज के लिए चेतावनी है। बच्चों से उम्मीदें रखना गलत नहीं, लेकिन गुस्से और हिंसा का रास्ता मासूम जिंदगियों को खत्म कर सकता है।








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