असमिया भाषा और उसकी समृद्ध साहित्यिक परंपरा के लिए यह एक गर्व का क्षण है। माननीय राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने हाल ही में राष्ट्रपति भवन में “ग्रंथ कुटीर” नामक संरक्षणागार का उद्घाटन किया, जहां ध्रुपद (शास्त्रीय) दर्जा प्राप्त भारतीय भाषाओं की अमूल्य पांडुलिपियों के संरक्षण की व्यवस्था की गई है।
इस संग्रहालय में श्रीमंत शंकरदेव कलाक्षेत्र की पहल पर संकलित असमिया साहित्य की कई दुर्लभ सांचीपत्र पांडुलिपियां भी सुरक्षित रखी गई हैं। इनमें कीर्तन घोषा, नामघोषा, दशम और भक्ति-रत्नावली जैसे ऐतिहासिक और आध्यात्मिक ग्रंथ शामिल हैं।
हाल ही में असमिया भाषा को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद यह पहल भाषा के लिए एक और बड़ी राष्ट्रीय मान्यता मानी जा रही है। यह न केवल असमिया भाषा की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में अहम कदम है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए इस गौरवशाली परंपरा को जीवित रखने का भी सशक्त प्रयास है।
मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने इसे असमिया भाषा और असम की सांस्कृतिक पहचान के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया है।








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