गुवाहाटी: मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी शाखा द्वारा असम के महान साहित्यकार, सांस्कृतिक चिंतक एवं असमिया सिनेमा के जनक स्वर्गीय रूप कुंवर ज्योति प्रसाद अग्रवाला की 75वीं पुण्य तिथि के अवसर पर “शिल्पी दिवस” कार्यक्रम का भावपूर्ण एवं गरिमामय आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम श्रद्धांजलि मार्केट, केल्विन सिनेमा स्थित मारवाड़ी सम्मेलन शाखा कार्यालय में सम्पन्न हुआ।
कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रख्यात लेखक एवं साहित्यकार विनोद रिंगनिया तथा वरिष्ठ पत्रकार एवं संपादक प्रमोद तिवाड़ी को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया।
श्री रिंगनिया ने अपने सारगर्भित उद्बोधन में स्वर्गीय ज्योति प्रसाद अग्रवाला के जीवन के अनेक अनछुए पहलुओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन असमिया भाषा, संस्कृति एवं साहित्य को समर्पित कर दिया। उन्होंने यह भी कहा कि असम में सिनेमा की शुरुआत करने का श्रेय भी स्वर्गीय ज्योति प्रसाद अग्रवाला को ही जाता है।
वरिष्ठ पत्रकार प्रमोद तिवाड़ी ने अपने विचार रखते हुए कहा कि समाज को चाहिए कि वह युवाओं को व्यवसाय के साथ-साथ रचनात्मक एवं सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी प्रेरित करे। संगठित प्रयासों से समाज भविष्य में भी ज्योति प्रसाद अग्रवाला जैसी महान विभूतियों का निर्माण कर सकता है।
इस अवसर पर पूर्वोत्तर मारवाड़ी सम्मेलन के प्रांतीय अध्यक्ष कैलाश काबरा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा कि स्वर्गीय ज्योति प्रसाद अग्रवाला ने अपना पूरा जीवन साहित्य और संस्कृति को समर्पित कर दिया। उन्होंने इस प्रकार के प्रेरणादायी एवं सार्थक कार्यक्रमों के निरंतर आयोजन की आवश्यकता पर बल दिया।
मारवाड़ी सम्मेलन, गुवाहाटी शाखा के अध्यक्ष शंकर बिड़ला ने सभी आगंतुकों एवं श्रोताओं का स्वागत करते हुए कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत अपने प्रेरक संबोधन से की।
कार्यक्रम में संतोष वैद एवं सुश्री प्रज्ञा माया शर्मा ने भी अपने विचार व्यक्त कर स्वर्गीय ज्योति प्रसाद अग्रवाला को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।
कार्यक्रम का कुशल संचालन एवं संयोजन मनोज चाण्डक नायाब द्वारा किया गया, जबकि अशोक सेठिया ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया।
इस अवसर पर शाखा के सचिव सूरज सिंघानिया, कोषाध्यक्ष नरेंद्र सोनी,उपाध्यक्ष प्रदीप भुवालका, पूर्वोत्तर संगठन मंत्री मनोज काला सहित कार्यकारिणी सदस्य प्रदीप पाटनी, राकेश भातरा, विनोद कुमार जिंदल, राजेश भजनका एवं कैलाश चितलांगिया उपस्थित रहे।
कार्यक्रम श्रद्धा, साहित्य, संस्कृति एवं सामाजिक चेतना से ओतप्रोत रहा और उपस्थित श्रोताओं के मन में स्वर्गीय ज्योति प्रसाद अग्रवाला के प्रति गहरी कृतज्ञता एवं प्रेरणा का भाव उत्पन्न हुआ।








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