लखीमपुर चिकित्सा महाविद्यालय में मानवता की मिसाल: प्रथम मरणोपरांत देहदान ने रचा इतिहास, समाज के लिए बना प्रेरणास्रोत - Rise Plus

NEWS

Rise Plus

असम का सबसे सक्रिय हिंदी डिजिटल मीडिया


Post Top Ad

लखीमपुर चिकित्सा महाविद्यालय में मानवता की मिसाल: प्रथम मरणोपरांत देहदान ने रचा इतिहास, समाज के लिए बना प्रेरणास्रोत

 



नायक परिवार ने सिद्ध किया कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि सेवा और ज्ञान की एक नई शुरुआत भी हो सकती है


लखीमपुर से राजेश राठी और ओम प्रकाश तिवाड़ी की रिपोर्ट 


लखीमपुर चिकित्सा महाविद्यालय के इतिहास में शुक्रवार का दिन मानवता, संवेदना और सेवा भावना की स्वर्णिम इबारत लिख गया। चिकित्सा महाविद्यालय में पहली बार मरणोपरांत देहदान का पुण्य कार्य संपन्न हुआ, जिसने न केवल संस्थान बल्कि पूरे समाज को भावुक कर दिया। यह ऐतिहासिक देहदान लखीमपुर के प्रतिष्ठित ओ•पी•डी• कॉलेज के अंग्रेज़ी विभाग के सेवानिवृत्त अध्यापक तथा के•बी•रोड• निवासी फकीर मोहन नायक द्वारा किया गया, जिन्होंने जीवनकाल में ही मानव कल्याण हेतु अपने पार्थिव शरीर को चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए समर्पित करने का संकल्प लिया था। श्री नायक ने नॉटरीकृत शपथ-पत्र के माध्यम से यह स्पष्ट इच्छा व्यक्त की थी कि उनके निधन के उपरांत उनका शरीर चिकित्सा विज्ञान के विद्यार्थियों और अनुसंधान के लिए उपयोग में लाया जाए, जिससे आने वाली पीढ़ियों को लाभ मिल सके। बीती रात उच्च रक्तचाप एवं मधुमेह जनित बीमारी के कारण उनके निधन के पश्चात, शुक्रवार को उनके शोकसंतप्त परिजनों ने अत्यंत साहस और सामाजिक चेतना का परिचय देते हुए उनकी अंतिम इच्छा का पूर्ण सम्मान किया और उनका पार्थिव शरीर लखीमपुर चिकित्सा महाविद्यालय को दान किया। यह देहदान मात्र एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि मानवीय मूल्यों, वैज्ञानिक चेतना और सामाजिक दायित्व का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया। इस भावुक अवसर पर चिकित्सा महाविद्यालय के अधीक्षक डॉ. रक्तिम बोरगुहाई, शरीर रचना विभाग के प्रोफेसर एवं विभागाध्यक्ष डॉ. इंद्र नाथ सुतिया, प्रोफेसर (DACP) डॉ. हीरक दास, सीनियर रेजिडेंट डॉ. परमिता साहा, डॉ. गीतार्थ गोस्वामी (DRP) सहित महाविद्यालय के छात्र एवं कर्मचारीगण उपस्थित रहे। सभी ने गहन शोक की इस घड़ी में परिवार को ढांढस बंधाया और नायक के पार्थिव शरीर को पूर्ण सम्मान, गरिमा और संवेदनशीलता के साथ स्वीकार किया। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2024 में निरामय न्यास के माध्यम से फकीर मोहन नायक एवं उनकी धर्मपत्नी रानू हजारिका ने परिवार की पूर्ण सहमति से देहदान का संकल्प लिया था। मानव सेवा के प्रति उनकी सोच की व्यापकता का प्रमाण यह भी है कि चिकित्सा महाविद्यालय द्वारा नायक की कॉर्निया का संरक्षण किया गया, जिससे भविष्य में किसी दृष्टिहीन व्यक्ति को नया प्रकाश मिल सके। फकीर मोहन नायक का यह निःस्वार्थ, दूरदर्शी और साहसिक निर्णय यह संदेश देता है कि मृत्यु जीवन का अंत नहीं, बल्कि सेवा और ज्ञान की एक नई शुरुआत भी हो सकती है। उनका यह महान योगदान आने वाले वर्षों में चिकित्सा विद्यार्थियों के लिए अध्ययन और शोध का अमूल्य आधार बनेगा, वहीं समाज को यह प्रेरणा देगा कि देहदान जैसे पवित्र कार्य के माध्यम से मृत्यु के बाद भी हम अनेक जिंदगियों को दिशा और रोशनी दे सकते हैं। निश्चय ही फकीर मोहन नायक का यह मानवीय कदम, उनकी धर्मपत्नी एवं परिजनों का सहयोग आने वाली पीढ़ियों के लिए करुणा, सेवा और सामाजिक उत्तरदायित्व का स्थायी संदेश बनकर जीवित रहेगा।

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

नियमित रूप से WhatsApp पर हमारी खबर प्राप्त करने के लिए दिए गए 'SUBSCRIBE' बटन पर क्लिक करें