मेघालय के शिलांग निवासी प्रख्यात शिक्षाविद, समाजसेवी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य करने वाले डॉ. विकास शर्मा का निधन गत 5 मार्च को हो गया। वे जगदीश शर्मा खेडवाल एवं स्वर्गीय सुशीला शर्मा के सुपुत्र थे। उनके निधन से न केवल ब्राह्मण समाज बल्कि पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय शिक्षा जगत को एक बड़ी क्षति पहुँची है।
डॉ. विकास शर्मा शिक्षा, प्रबंधन और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में एक बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी थे। वे एक प्रतिष्ठित शिक्षाविद, प्रबंधन विशेषज्ञ, सामाजिक उद्यमी और परोपकारी व्यक्तित्व के रूप में जाने जाते थे। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने दो दशकों से अधिक समय तक सक्रिय भूमिका निभाई और हजारों विद्यार्थियों के जीवन को दिशा देने का कार्य किया।
उन्होंने इंटरनेशनल एकेडमिक एंड मैनेजमेंट एसोसिएशन (IAMA) की स्थापना की, जिसका उद्देश्य शिक्षा को अधिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और सीमाओं से परे बनाना था। उनके नेतृत्व में यह संस्था दुनिया के 44 से अधिक देशों में कार्यरत हुई और 200 से अधिक शैक्षणिक संस्थानों के साथ मिलकर हजारों विद्यार्थियों को लाभान्वित किया।
डॉ. शर्मा कई अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक संस्थानों और संगठनों से भी जुड़े रहे। वे IAMA इंटरनेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा, इंटरनेशनल बोर्ड फॉर स्किल असेसमेंट एंड सर्टिफिकेशन (USA) तथा IAMA स्कूल ऑफ वोकेशनल एंड टेक्निकल एजुकेशन के संस्थापक अध्यक्ष रहे। इसके अलावा वे विश्व के अनेक विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक परिषदों के सलाहकार, बोर्ड सदस्य और शैक्षणिक मार्गदर्शक के रूप में भी कार्य करते रहे।
सामाजिक क्षेत्र में भी उनका योगदान अत्यंत उल्लेखनीय रहा। उन्होंने अष्टलक्ष्मी डेवलपमेंटल काउंसिल जैसी संस्था के माध्यम से पूर्वोत्तर भारत के पिछड़े और जनजातीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए कार्य किया। शिक्षा, कृषि, पशुपालन और सांस्कृतिक संरक्षण जैसे क्षेत्रों में उनके प्रयासों से अनेक लोगों को लाभ मिला।
डॉ. विकास शर्मा की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्हें वर्ष 2023 में नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था। इसके अतिरिक्त उन्हें अमेरिका के राष्ट्रपति स्वयंसेवी सेवा पुरस्कार, एशिया HRD अवार्ड, तथा अनेक अंतरराष्ट्रीय सम्मानों से नवाज़ा गया।
वे ग्लोबल ब्राह्मण परिषद के अध्यक्ष भी रहे और समाज के सांस्कृतिक एवं शैक्षणिक उत्थान के लिए लगातार कार्य करते रहे। शिक्षा के माध्यम से विश्व शांति और मानवता की सेवा उनके जीवन का मूल उद्देश्य था।
डॉ. विकास शर्मा अपने कार्य, विचार और दृष्टि के कारण देश-विदेश में सम्मानित रहे। शिक्षा के क्षेत्र में उनकी दूरदृष्टि, सामाजिक प्रतिबद्धता और मानवीय संवेदनशीलता उन्हें एक विशिष्ट पहचान देती है।
उनके निधन से शिक्षा जगत, सामाजिक संस्थाओं और ब्राह्मण समाज में शोक की लहर है। उनके द्वारा किए गए कार्य आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देते रहेंगे ।









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