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दांतों की सेहत पर जागरूकता का संदेश: गुवाहाटी में प्रसिद्ध चिकित्सक डॉ. दिलीप सेठिया की पहली पुस्तक ‘दंत’ का विमोचन

 


गुवाहाटी. लेखक व जाने माने चिकित्सक डॉक्टर दिलीप सेठिया की प्रथम असमिया और हिंदी पुस्तक दंत का विमोचन पलटन बाजार स्थित होटल नंदन में एक समारोह में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में डॉक्टर अपूर्व कुमार अध्यापक, विशिष्ट अतिथि के रूप में डॉक्टर अंजन ज्योति चौधरी, वरिष्ठ पत्रकार रवि शंकर रवि एवं गायिका मयूरी दत्त के कर कमलो से पुस्तक का विमोचन किया गया। इससे पहले पुस्तक के लेखक डॉ दिलीप सेठिया ने स्वागत भाषण देते हुए बताया कि पुस्तक में दांत से संबंधित स्वास्थ्य एवं ज्ञानवर्धक जानकारी और जागरूकता पर विशेष लेखन कार्य किया गया है। यह पुस्तक बृजेंद्र नाथ डेका के विशाल प्रकाशक में प्रकाशित की गई है। इस पुस्तक में दंत रोगी के मन में बसे डर को निकालने का प्रयास किया गया है। पुस्तक में दंत संबंधी रोग की जागरूकता पर विशेष प्रकाश डाला गया है। ताकि रोगी जागरूक हो और कई रोगों से मुक्त होकर स्वयं को छुटकारा दिला सके। मुख्य अतिथि डॉक्टर अपूर्व कुमार अध्यापक ने कहा कि दंत नामक पुस्तक का लेखन करके डॉक्टर दिलीप सेठिया ने कई लोगों को जागरूक करने का कार्य किया है। दांत की बीमारी स्वयं ही नहीं लगती बल्कि दांत को सही ढंग से रख रखाव नहीं करने के कारण बीमारियां लगती है। पूर्वोत्तर में स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता की काफी कमी है। इस क्षेत्र में जागरूकता लाने के लिए यह पुस्तक भी अहम भूमिका निभा सकती है। जिसके चलते दांत से हुए मुंह में कैंसर जैसे रोग से लोगों को छुटकारा मिल जाएगा। इस पुस्तक को ई बुक के रूप में भी अगर प्रकाशित किया जाए तो ज्यादा से ज्यादा लोग इसे अपने मोबाइल में ही पढ़कर लाभान्वित हो सकेंगे। वरिष्ठ पत्रकार रवि शंकर रवि ने अपने संबोधन की हर पंक्ति में दांतों से संबंधित मुहावरों का प्रयोग करते हुए व्यंग के माध्यम से कई सारगर्भित बातें बताई। उन्होंने कहा कि भगवान ने हमें मोती जैसे दांत दिए हैं मगर हमने दांतों को मोती जैसा नहीं रखा है। दांतों की देखभाल सुंदरता के लिए नहीं बल्कि सेहत के लिए भी जरूरी है। जिंदगी में खुशहाल बनने के लिए अपने दांत व सेहत को बचाकर रखना चाहिए। विशिष्ट अतिथि डॉक्टर अंजन ज्योति चौधरी ने भी अपने संस्मरणों से सबको हंसा कर लोटपोट कर दिया। उन्होंने कहा कि हमेशा हंसते रहना चाहिए। हंसने से मनुष्य काफी तंदुरुस्त रहता है। हंसने से मुंह की मांसपेशियों के साथ-साथ दांतों की भी कसरत हो जाती है। गायिका मयूर दत्त ने कहा कि दांत एक अलंकार है इसको सहेज कर रखना हमारा काम है। दांतों को स्वस्थ रखने के लिए हर प्रकार के प्रयास करने चाहिए। मयूर दत्त ने गीतों की प्रस्तुति भी दी। दिलीप सेठिया की माता श्री निर्मला देवी सेठिया और धर्मपत्नी रंजना सेठिया ने सभी लोगों का आभार प्रकट करते हुए धन्यवाद ज्ञापन दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रसिद्ध उद्घोषक इंद्रजीत दास ने किया। कार्यक्रम में गोपाल जालान, वरिष्ठ पत्रकार नयन कुमार शर्मा, प्रकाशक बृजेंद्र नाथ डेका ने विशेष सहयोग दिया। इस अवसर पर कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

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