पूजा माहेश्वरी
"एक महीने में एक पुस्तक” पठन अभियान शुरू करने का प्रस्ताव पारित
नगांव, नगांव के अमलापट्टी शाखा साहित्य सभा की मेजबानी तथा रेनैसाँ कनिष्ठ महाविद्यालय के सहयोग से रविवार को रेनैसाँ कनिष्ठ महाविद्यालय परिसर में नगांव जिला साहित्य सभा का मध्यकालीन अधिवेशन आयोजित किया गया। नगांव जिला साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ. शरत बरकटकी की अध्यक्षता में आयोजित प्रतिनिधि सभा का उद्घाटन विशिष्ट साहित्यकार-पत्रकार गुरमाइल सिंह ने किया। उद्घाटन भाषण में गुरमाइल सिंह ने असम के सामाजिक जीवन में असम साहित्य सभा के महत्व का उल्लेख करते हुए कहा कि असम साहित्य सभा पिछले सौ से अधिक वर्षों से असम के जनजीवन को समृद्ध करती आ रही है। असम के सभी वर्गों के लोगों के जीवन में साहित्य सभा की गहरी उपस्थिति है। उन्होंने कहा कि साहित्य सभा से जुड़ी छोटी-मोटी विसंगतियां भी अक्सर समाचार माध्यमों में स्थान पाती हैं। हालांकि समय-समय पर आलोचना होती है, लेकिन सच्चे साहित्यप्रेमियों को इससे आहत नहीं होना चाहिए, क्योंकि जो लोग साहित्य सभा से प्रेम करते हैं, वही उसके हित में कठोर आलोचना भी करते हैं। उन्होंने प्रतिनिधियों से कहा कि असम साहित्य सभा ने हमें पहचान और सम्मान दिया है तथा जीवन को सार्थक बनाने के लिए एक मंच प्रदान किया है। इसलिए अपनी क्षमता के अनुसार साहित्य सभा को समृद्ध करना सभी का दायित्व है। उन्होंने यह भी कहा कि साहित्य सभा का मंच केवल साहित्यकारों के लिए ही नहीं, बल्कि साहित्य प्रेमियों और साहित्य साधना करने वालों के लिए भी हमेशा खुला रहना चाहिए। उन्होंने शाखा समितियों को मजबूत बनाने पर भी विशेष जोर दिया।
सभा का संचालन करते हुए और उद्देश्य स्पष्ट करते हुए नगांव जिला साहित्य सभा के सचिव राजीव कुमार हाजरिका ने कहा कि डिजिटल युग में ज्ञान, साहित्य और संस्कृति के प्रसार के अवसर पहले से अधिक बढ़ गए हैं, इसलिए साहित्य सभा की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। अध्यक्ष डॉ. शरत बरकटकी ने अपने भाषण में कहा कि असमिया भाषा और साहित्य को डिजिटल मंचों पर मजबूत रूप से स्थापित करना आज की प्रमुख आवश्यकता है। अनेक मूल्यवान ग्रंथ, पांडुलिपियां और शोध लेख अभी भी कागज तक सीमित हैं, इसलिए उन्हें डिजिटल रूप में संरक्षित कर ऑनलाइन उपलब्ध कराना समय की मांग है।
उन्होंने कहा कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल, इंटरनेट और सोशल मीडिया के माध्यम से अधिक सक्रिय है। इसलिए साहित्य सभा को डिजिटल प्लेटफॉर्म, ऑनलाइन चर्चा और ई-मैगजीन जैसे माध्यमों से युवाओं को साहित्य से जोड़ना होगा। उन्होंने सोशल मीडिया में असमिया भाषा के शुद्ध प्रयोग और उसकी मानकता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया । साथ ही डिजिटल आर्काइव और सूचना भंडार तैयार करने पर भी बल दिया। सभा में नगांव जिला साहित्य सभा के पूर्व अध्यक्ष थगित महंत ने साहित्य सभा की जिम्मेदारियों पर प्रकाश डाला। असम साहित्य सभा के नगांव आंचलिक कार्यालय के सचिव रेवत कुमार हाजरिका ने भी सभा की भूमिका पर चर्चा करते हुए इस अधिवेशन को रचनात्मक बताया। सहायक सचिव मृगांक बोरा ने कुछ शाखा साहित्य सभाओं की कमजोर गतिविधियों पर चिंता व्यक्त की। इस अवसर पर सचिव राजीव कुमार हाजरिका ने संपादकीय प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।
सभा में डिजिटल युग में असमिया साहित्य के विकास के लिए ई-बुक, ऑनलाइन साहित्य पोर्टल, ऑनलाइन पत्रिका और डिजिटल आर्काइव जैसे प्रयासों का स्वागत करते हुए प्रस्ताव पारित किया गया। साथ ही समाज में पठन-संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से “एक महीने में एक पुस्तक” पठन अभियान शुरू करने का भी प्रस्ताव लिया गया। इसके तहत मासिक बैठकों में सदस्य पढ़ी हुई पुस्तक पर संक्षिप्त चर्चा करेंगे।
इसके अतिरिक्त असमिया भाषा, साहित्य, इतिहास और संस्कृति पर शोध तथा नए ग्रंथों के प्रकाशन को प्रोत्साहन देने का प्रस्ताव भी पारित किया गया। राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा जिले के विभिन्न स्थानों के नामों को गलत वर्तनी में लिखे जाने पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रतिनिधि सभा ने नामपट्टों पर असमिया की शुद्ध वर्तनी का उपयोग करने का आह्वान किया।
सभा में असम साहित्य सभा के उपाध्यक्ष पदुम राजखोवा, रेनैसाँ कनिष्ठ महाविद्यालय के उपाचार्य बिचित्र नारायण सइकिया तथा जिला साहित्य सभा के पदाधिकारी डॉ. हेमंत कुमार गोस्वामी, महेश चंद्र नाथ, सुरजीत गोस्वामी, जितेन बरकटकी, मनोज कुमार शर्मा, अभिजीत शर्मा, खगेन चंद्र नाथ सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।
कार्यक्रम की शुरुआत अमलापट्टी शाखा साहित्य सभा की महिला सदस्यों द्वारा “चिर सेनेही मुर भाषा जननी” गीत की प्रस्तुति से हुई। सभा में हाल ही में दिवंगत धीरेंद्रनाथ चक्रवर्ती सहित कई लोग के सम्मान में मौन प्रार्थना भी की गई। सभा में उपस्थित पदाधिकारियों और प्रतिनिधियों का स्वागत समिति की ओर से पुस्तकों और स्मृति-चिन्हों से सम्मानित किया गया। रेनैसाँ कनिष्ठ महाविद्यालय के प्राचार्य पार्थजीत बरुआ के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ ही अधिवेशन के समन्वयक प्रियंकु शर्मा को सम्मानित किया गया। अधिवेशन के अवसर पर सुबह जिला अध्यक्ष डॉ. शरत बरकटकी ने ध्वजारोहण किया और उपाचार्य बिचित्र नारायण सइकिया ने स्मृति-तर्पण किया।









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