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दिशा और ग्रह: घर को समझने का एक सीधा तरीका

 


वास्तु और ज्योतिष को साथ में समझने का एक आसान तरीका है।

हर दिशा को एक ग्रह से जोड़कर देखें, और उस ग्रह के गुणों को समझें।

जिस चीज़ की कमी है, उस ग्रह को देखें और उसकी दिशा को ठीक करें।

वास्तु ग्रंथों में भी बताया गया है कि सही गुणों से युक्त स्थान जीवन में सुख और वृद्धि लाता है ।

अब इसे सीधे तरीके से समझते हैं।

पूर्व दिशा – सूर्य ग्रह

सूर्य आत्मविश्वास, ऊर्जा और पहचान का प्रतिनिधित्व करता है।

इसलिए पूर्व दिशा को व्यक्ति की आगे बढ़ने की क्षमता से जोड़ा जाता है।

अगर यह दिशा बंद या अंधेरी हो, तो आत्मविश्वास कम महसूस हो सकता है या व्यक्ति अपनी पूरी क्षमता नहीं दिखा पाता।

अगर आत्मविश्वास कम है, तो इस दिशा को ठीक करें।

क्या करें:

• इस दिशा को खुला और साफ रखें

• सुबह की धूप आने दें

• हल्के नारंगी या सुनहरे रंग रखें

• तांबे की वस्तु रख सकते हैं

उत्तर दिशा – बुध ग्रह

बुध बुद्धि, निर्णय और व्यापार से जुड़ा है।

इसलिए उत्तर दिशा को समझ और धन के प्रवाह से जोड़ा जाता है।

अगर यह दिशा अव्यवस्थित हो, तो निर्णय लेने में भ्रम और आर्थिक रुकावट आ सकती है।

अगर clarity या धन में समस्या है, तो इस दिशा को ठीक करें।

क्या करें:

• इस हिस्से को साफ और हल्का रखें

• हरे रंग का हल्का उपयोग करें

• पौधे रख सकते हैं

• कागज़ और काम की चीज़ें व्यवस्थित रखें

दक्षिण दिशा – मंगल ग्रह

मंगल शक्ति, साहस और सुरक्षा का ग्रह है।

इसलिए दक्षिण दिशा को स्थिरता और मजबूती से जोड़ा जाता है।

अगर यह दिशा कमजोर हो, तो असुरक्षा या दबाव महसूस हो सकता है।

अगर जीवन में मजबूती कम लग रही है, तो इस दिशा को मजबूत करें।

क्या करें:

• यहाँ भारी फर्नीचर रखें

• इस हिस्से को मजबूत और व्यवस्थित रखें

पश्चिम दिशा – शनि ग्रह

शनि धैर्य, अनुशासन और परिणाम से जुड़ा है।

इसलिए पश्चिम दिशा को टिकाव और स्थिरता से जोड़ा जाता है।

अगर यहाँ असंतुलन हो, तो काम में देरी या मेहनत का पूरा फल नहीं मिलता।

अगर चीज़ें देर से हो रही हैं, तो इस दिशा को संतुलित करें।

क्या करें:

• इस हिस्से को सादा और साफ रखें

• अनावश्यक सामान हटाएँ

ईशान दिशा – गुरु ग्रह

गुरु ज्ञान, समझ और मार्गदर्शन से जुड़ा है।

इसलिए यह दिशा घर की सबसे शांत और हल्की जगह मानी जाती है।

अगर यह जगह भरी या गंदी हो, तो ध्यान और मानसिक स्पष्टता कम हो सकती है।

अगर शांति और स्पष्टता चाहिए, तो इस दिशा को हल्का रखें।

क्या करें:

• यहाँ खाली जगह रखें

• पूजा या शांत कार्य के लिए उपयोग करें

● यहाँ जल रखें

आग्नेय दिशा – शुक्र ग्रह

यह दिशा ऊर्जा, सुविधा, वैभव और अग्नि से जुड़ी है।

इसलिए इसे रसोई के लिए उपयुक्त माना जाता है।

अगर यह दिशा असंतुलित हो, तो चिड़चिड़ापन या तनाव बढ़ सकता है।

अगर घर में तनाव, विलासिता की कमी बढ़ रही है, तो इस दिशा को संतुलित करें।

क्या करें:

• यहाँ किचन रखें या अग्नि तत्व रखें

• इस हिस्से को साफ और सुन्दर रखें

वायव्य दिशा – चंद्र ग्रह

चंद्र मन और भावनाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

इसलिए यह दिशा मानसिक स्थिति से जुड़ी होती है।

अगर यह दिशा खराब हो, तो बेचैनी या मन का असंतुलन महसूस हो सकता है।

अगर मन शांत नहीं है, तो इस दिशा को ठीक करें।

क्या करें:

• हल्के रंग रखें

• हवा और रोशनी आने दें

नैऋत्य दिशा – राहु (स्थिरता का क्षेत्र)

यह दिशा नियंत्रण और स्थिरता से जुड़ी मानी जाती है।

अगर यह कमजोर हो, तो जीवन में पकड़ कम महसूस हो सकती है।

अगर चीज़ें टिक नहीं रही हैं, तो इस दिशा को मजबूत करें।

क्या करें:

• यहाँ भारी सामान रखें

• इस हिस्से को स्थिर और व्यवस्थित रखें

सीधी बात

जो कमी है, उसी ग्रह को देखें।

और उस ग्रह की दिशा को ठीक करें।

🖋️ रिपोर्ट: देवकी नंदन देवड़ा

मो. 9377607101


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