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'ईश्वर हमारे भीतर हैं' — बोध सत्र में मैत्री वत्सल जी ने दिया आत्मबोध का संदेश



तेजपुर: मैत्रीबोध परिवार के संस्थापक परम पूज्य मैत्रय दादाश्री जी के सर्वत्र शांति, प्रेम एवं आत्मिक जागरण के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के उद्देश्य से आज स्थानीय मारवाड़ी धर्मशाला, तेजपुर में एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। 'अवेकनिंग टू सेल्फ रियलाइजेशन (आत्म-जागृति की ओर पहला कदम – बोध वन लेवल)' विषय पर आयोजित इस सत्र में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं, प्रबुद्ध नागरिकों एवं आध्यात्मिक साधकों ने भाग लिया।


सत्र का संचालन मुंबई से पधारे वरिष्ठ मार्गदर्शक मैत्री वत्सल जी ने किया। उन्होंने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में कहा कि वर्तमान समय में अधिकांश लोग बाहरी पहचान, भूमिकाओं और परिस्थितियों के मुखौटे के पीछे अपना वास्तविक स्वरूप भूल चुके हैं। जीवन का वास्तविक उद्देश्य अपने भीतर स्थित सत्य, प्रेम और शांति को पहचानना तथा आत्म-जागृति के मार्ग पर आगे बढ़ना है।


उन्होंने बताया कि ईश्वर कोई दूर की सत्ता नहीं, बल्कि प्रत्येक व्यक्ति के अंतर्मन में विद्यमान चेतना हैं। जब व्यक्ति स्वयं को पहचानना प्रारंभ करता है, तभी उसके जीवन में प्रेम, करुणा, मैत्री और आंतरिक शांति का वास्तविक अनुभव संभव हो पाता है।


कार्यक्रम में मैत्रेयी कुमुदिनी जी, मैत्रेयी अनुराधा जी, मैत्रेयी मधुमिता जी, मित्र हिमशिखर जी, मैत्रेयी अनीता जी सहित मैत्रीबोध परिवार के अनेक समर्पित सेवकगण उपस्थित रहे। कार्यक्रम के सफल संचालन एवं व्यवस्थापन हेतु मुंबई से लगभग 15 सदस्यों की विशेष टीम तेजपुर पहुँची थी। उनके सहयोग एवं समर्पण ने आयोजन को अत्यंत सुव्यवस्थित और प्रेरणादायी बनाया।


इस अवसर पर तेजपुर के स्थानीय श्रद्धालुओं के अतिरिक्त गुवाहाटी, पुणे एवं मुंबई से आए अनेक साधक और गणमान्य अतिथि भी उपस्थित रहे। सत्र के दौरान उपस्थित प्रतिभागियों ने आत्म-जागृति, सकारात्मक जीवन दृष्टि एवं आध्यात्मिक उन्नति से जुड़े विभिन्न विषयों पर गहन चिंतन किया तथा मैत्रय दादाश्री जी के प्रेम, मैत्री और विश्वशांति के संदेश को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया।


कार्यक्रम का समापन सामूहिक प्रार्थना एवं विश्वशांति की मंगलकामना के साथ हुआ। उपस्थित सभी प्रतिभागियों ने इस सत्र को आत्मचिंतन, आत्मबोध और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा में एक महत्वपूर्ण अनुभव बताया।

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