गुवाहाटी नगर निगम (जीएमसी) द्वारा शहर को स्वच्छ बनाने के उद्देश्य से 16 प्रकार के उल्लंघनों पर भारी जुर्माने का प्रावधान स्वागतयोग्य कदम है। सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकने, नालियों में प्लास्टिक और गंदगी डालने तथा खुले में मूत्रत्याग जैसी गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई का संदेश निश्चित रूप से शहर में स्वच्छता के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा।
लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल जुर्माना लगाने से शहर स्वच्छ हो जाएगा? यदि नगर निगम स्वयं अपने अधिकार क्षेत्र में वर्षों से मौजूद गंदगी के स्थायी ठिकानों को समाप्त नहीं कर पा रहा है, तो कार्रवाई का नैतिक आधार भी कमजोर पड़ जाता है।
आठगांव के सती जयमति रोड स्थित नीलकंठ शिवालय के पास वर्षों से बना कचरे का गड्ढा इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। स्थानीय लोगों ने इसे कचरा डालने का स्थायी स्थान मान लिया है। नगर निगम ने कुछ महीने पहले इसे भरकर समतल किया, लेकिन थोड़े ही समय बाद गड्ढा फिर खोद दिया गया और आज वह पहले से भी बड़ा हो चुका है। बरसात में वहां जमा गंदा पानी, दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप पूरे इलाके के लिए परेशानी का कारण बन गया है।
यदि वहां आसपास कोई मकान या प्रतिष्ठान नहीं है, तो फिर इस गंदगी के लिए जिम्मेदार कौन है? नए नियमों के तहत जुर्माना किस पर लगाया जाएगा? यही प्रश्न आठगांव गणेश मंदिर फ्लाईओवर के नीचे नियमित रूप से लगने वाले कचरे के ढेर पर भी लागू होता है।
इसी प्रकार, मारवाड़ी हॉस्पिटल से छत्रीबाड़ी गौशाला की ओर जाने वाले मार्ग पर गौशाला की दीवार के किनारे खुले में मूत्रत्याग वर्षों से सामान्य दृश्य बना हुआ है। नगर निगम ने जुर्माने की घोषणा तो कर दी है, लेकिन क्या वहां पर्याप्त सार्वजनिक शौचालय उपलब्ध हैं? क्या नियमित निगरानी की व्यवस्था है? यदि नहीं, तो केवल दंड का प्रावधान समस्या का स्थायी समाधान नहीं बन सकता।
स्वच्छ शहर बनाने की जिम्मेदारी केवल नागरिकों की नहीं, बल्कि नगर निगम की भी समान रूप से है। जहां नागरिक नियमों का पालन करें, वहीं निगम को कचरा निस्तारण, नियमित सफाई, निगरानी और बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने की अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी होगी।
जुर्माना तभी प्रभावी होगा, जब उसके साथ जवाबदेही भी तय होगी। नगर निगम को यह स्पष्ट करना चाहिए कि सार्वजनिक स्थानों पर लगातार गंदगी जमा होने की स्थिति में संबंधित विभाग, सफाई एजेंसी या जिम्मेदार अधिकारियों की क्या जवाबदेही होगी।
स्वच्छ गुवाहाटी का सपना केवल दंड से नहीं, बल्कि प्रशासन और नागरिकों की साझा जिम्मेदारी, सतत निगरानी और ईमानदार क्रियान्वयन से ही साकार हो सकता है। तभी "स्वच्छ भारत" अभियान का वास्तविक उद्देश्य भी पूरा होगा।








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