आचार्य महाश्रमण के सुशिष्य मुनि आनंद कुमार 'कालू एवं सहवर्ती मुनि विकास कुमार' का तेरापंथ धर्मस्थल, गुवाहाटी में भव्य चातुर्मासिक मंगल प्रवेश अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और उल्लासपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। सुबह से हो रही वर्षा के थमने के पश्चात प्रात: 9:49 बजे मुनिद्वय ने शुभकरण मनीष सिंघी के निवास स्थान से मंगल विहार प्रारंभ किया और विशाल धर्मसभा की उपस्थिति में तेरापंथ धर्मस्थल पहुंचकर चातुर्मासिक मंगल प्रवेश किया। इस अवसर पर पूरे परिसर में भक्ति, श्रद्धा और आध्यात्मिक उल्लास का वातावरण देखने को मिला।
कार्यक्रम का शुभारंभ मुनिश्री के मंगल महामंत्रोच्चार से हुआ। तत्पश्चात मुनि आनंद कुमार ने चातुर्मास वर्षावास स्थापना अनुष्ठान संपन्न कराया। तेरापंथ महिला मंडल द्वारा प्रस्तुत मंगलाचरण ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
स्वागत समारोह में तेरापंथी सभा गुवाहाटी के अध्यक्ष रितेश खटेड़, सभा के निवर्तमान अध्यक्ष बाबूलाल सुराणा, तेरापंथी महासभा के उपाध्यक्ष विजय चोपड़ा, तेरापंथ महिला मंडल की अध्यक्ष सुशीला मालू, तेरापंथ युवक परिषद के अध्यक्ष रोहित सुराणा, तेरापंथ प्रोफेशनल फोरम के अध्यक्ष पंकज भूरा, अणुव्रत समिति की मंत्री रंजना बरड़िया, एटीएमआरएफ के मंत्री अजय भंसाली, अर्हम् भजन मंडली, आध्यात्मिक भजन मंडली शांतिपुर, जैन विश्व भारती के कार्यकारिणी सदस्य मनीष सिंघी, नगांव सभा के अध्यक्ष विनोद बोथरा, खारुपेटिया से पधारी सरोज दुगड़ सहित मुनिश्री के संसार पक्षीय परिजनों एवं विभिन्न सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने गीतिकाओं, उद्बोधनों एवं भावपूर्ण शब्दों के माध्यम से मुनिद्वय का अभिनंदन किया।
अपने प्रेरणादायी मंगल उद्बोधन में मुनि आनंद कुमार 'कालू ने कहा कि चातुर्मास केवल चार महीनों का ठहराव नहीं, बल्कि ज्ञान, दर्शन, चारित्र और तप की साधना का अमूल्य अवसर है। यह आत्मनिरीक्षण, आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का श्रेष्ठ समय है। उन्होंने कहा कि मनुष्य का वास्तविक सुख बाहरी भौतिक साधनों में नहीं, बल्कि अपने अंतर्मन की शांति, संयम और साधना में निहित है। संतों का सान्निध्य जीवन को नई दिशा देता है और चातुर्मास के दौरान अधिकाधिक धर्म, स्वाध्याय, सामायिक, प्रेक्षाध्यान तथा सेवा-साधना से जुड़कर जीवन को सार्थक बनाया जा सकता है।








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