गुवाहाटी, नारेंगी के समीप स्थित बोंदागांव सार्वजनिक नामघर ट्रस्ट द्वारा निर्मित सार्वजनिक नामघर-सभागार का बुधवार को विधिवत उद्घाटन किया गया। धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक परंपरा के वातावरण में आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में स्थानीय श्रद्धालुओं एवं गणमान्य लोगों ने भाग लिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रातःकाल विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना से हुआ। इसके उपरांत स्वर्गीय प्रताप चंद्र हलोई एवं धीरेंद्र बर्मन के चित्रों पर क्रमशः रेवती हलोई और मीरा बर्मन ने श्रद्धासुमन अर्पित किए। हरेकृष्ण डेका ने स्मृति-तर्पण किया। इसके बाद नृपेन दत्ता, गर्गराम पटवारी तथा सेवानिवृत्त शिक्षक शरत कलिता ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
नवनिर्मित नामघर एवं सभागार के निर्माण में भूमि दान देने वाले परिवारों के प्रतिनिधियों—विश्वनाथ गोयनका, रतन गोयनका, मधुलता गोयनका तथा सीमा गोयनका—का महत्वपूर्ण योगदान रहा। इस अवसर पर देव सैकिया ने गुरु आसन पर गुणमाला स्थापित कर धार्मिक अनुष्ठान को पूर्णता प्रदान की।
उद्घाटन के उपरांत ट्रस्ट के अध्यक्ष मृगेन्द्र नाथ भुइयां की अध्यक्षता में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। ट्रस्ट के सचिव अमिताभ शर्मा ने कार्यक्रम का संचालन करते हुए स्वागत भाषण दिया तथा नामघर निर्माण के उद्देश्य एवं सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित असम साहित्य सभा के पूर्व कोषाध्यक्ष एवं कवि किशोर कुमार जैन ने कहा, "नामघर समाज को एकजुट रखने का महत्वपूर्ण माध्यम है। ईर्ष्या और द्वेष से किसी भी समस्या का समाधान नहीं होता। हमें सभी धर्मों का सम्मान करते हुए सामाजिक सद्भाव बनाए रखना चाहिए।"
समारोह में सेवानिवृत्त शिक्षक एवं लेखक दिलीप कुमार राय, बीरकुची वरिष्ठ नागरिक समिति के अध्यक्ष उमेश चंद्र शर्मा, शिवसागर विश्वविद्यालय की प्राध्यापिका डॉ. दीपांजलि दास, अरुण बड़ो तथा परागज्योति प्रकाशन के सचिव एवं पत्रकार दीपक शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।
इसके पश्चात प्रताप चंद्र मेधी ने दीप प्रज्वलित किया। महिलाओं द्वारा प्रस्तुत नाम-प्रसंग (भक्ति-कीर्तन) ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया और उपस्थित श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान की।
कार्यक्रम के समापन पर नामघर ट्रस्ट एवं क्षेत्रवासियों की ओर से नामघर निर्माण हेतु भूमि दान देने वाले चारों गोयनका परिवारों—विश्वनाथ गोयनका, रतन गोयनका, मधुलता गोयनका और सीमा गोयनका—को अंगवस्त्र एवं सम्मान-चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित लोगों ने इस योगदान को समाज के लिए प्रेरणादायी बताते हुए भविष्य में भी ऐसे सामाजिक एवं धार्मिक कार्यों में सहयोग की अपेक्षा व्यक्त की।









कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें