लखीमपुर से राजेश राठी और ओमप्रकाश तिवाड़ी की संयुक्त रिपोर्ट
लखीमपुर, मानव अधिकार संग्राम समिति (एमएएसएस) की लखीमपुर जिला इकाई ने देश की राजधानी दिल्ली में अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं एवं आंदोलनकारियों पर पुलिस द्वारा कथित रूप से किए गए लाठीचार्ज तथा आंसू गैस के इस्तेमाल की कड़े शब्दों में निंदा की है। संगठन ने इस कार्रवाई को लोकतांत्रिक अधिकारों के दमन का प्रयास बताते हुए सरकार से संयम बरतने और संवाद के माध्यम से समस्या का समाधान निकालने की अपील की है। एमएएसएस के केंद्रीय सचिव एवं लखीमपुर जिला सलाहकार राजू सिंहा ने जारी एक प्रेस बयान में कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिकों और विशेषकर छात्र समुदाय को अपनी मांगों और समस्याओं को शांतिपूर्ण एवं संवैधानिक तरीके से रखने का अधिकार प्राप्त है। यदि छात्र-छात्राएं लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे थे, तो उनकी बात सुनने के बजाय उन पर बल प्रयोग किया जाना अत्यंत चिंताजनक और लोकतांत्रिक मूल्यों के विपरीत है। उन्होंने कहा कि छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार करने और उनसे संवाद स्थापित करने के बजाय पुलिस द्वारा बल प्रयोग किया जाना लोकतांत्रिक व्यवस्था की भावना के अनुरूप नहीं है। ऐसे कदम न केवल अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित करते हैं, बल्कि समाज में असंतोष और अविश्वास का वातावरण भी उत्पन्न करते हैं। एमएएसएस की लखीमपुर जिला समिति के कार्यकारी अध्यक्ष देवरंजन बोरा तथा जिला सचिव हेमंत फुकन ने भी इस घटना की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि अपने अधिकारों के लिए शांतिपूर्ण ढंग से आवाज उठा रहे नागरिकों और छात्र समुदाय के विरुद्ध दमनात्मक कार्रवाई किसी भी लोकतांत्रिक समाज के लिए उचित नहीं कही जा सकती। उन्होंने कहा कि असहमति और विरोध लोकतंत्र का अभिन्न अंग हैं तथा सरकार का दायित्व है कि वह जनता की आवाज को सुने और संवाद के माध्यम से समाधान तलाशे। जिला समिति के नेताओं ने केंद्र सरकार एवं संबंधित प्रशासन से अपील की कि आंदोलनकारियों के विरुद्ध बल प्रयोग की नीति को तत्काल समाप्त किया जाए तथा लोकतांत्रिक परंपराओं और संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि किसी भी जन आंदोलन को शक्ति के बल पर दबाने के बजाय सरकार को आंदोलनकारी प्रतिनिधियों के साथ सम्मानजनक एवं रचनात्मक वार्ता कर उनकी समस्याओं का तार्किक, न्यायसंगत और स्थायी समाधान निकालने की दिशा में सकारात्मक पहल करनी चाहिए। एमएएसएस ने अपने बयान में यह भी कहा कि लोकतंत्र की मजबूती संवाद, सहिष्णुता और संवैधानिक मूल्यों के सम्मान से ही संभव है। इसलिए सरकार और प्रशासन को ऐसी परिस्थितियों में संयम का परिचय देते हुए शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं एवं जनता का विश्वास बना रहे।








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