गुवाहाटी, असम साहित्य सभा के तत्वावधान और असम नेपाली साहित्य सभा के सहयोग से गुवाहाटी के भगवतीप्रसाद बरुआ भवन में गोरखा समुदाय के एक बौद्धिक और सांस्कृतिक सम्मेलन का आयोजन किया गया। गणेशगुड़ी शाखा साहित्य सभा के कलाकारों द्वारा असमिया भाषा गान की प्रस्तुति के साथ इस समारोह की शुरुआत हुई। इस अवसर पर असम साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ. बसंत कुमार गोस्वामी ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कर्म और परिश्रम की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि किसी भी काम को पूरी निष्ठा के साथ अच्छी तरह से कर पाना ही अपने आप में सबसे बड़ा पुरस्कार है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जिसका हकदार है, उसे उसका अधिकार मिलकर ही रहता है और कठिन परिश्रम ही हमारे दुखों का अंत कर सकता है, क्योंकि हर प्रकार की संस्कृति का मूल आधार कड़ी मेहनत ही है। इस समागम का उद्घाटन करते हुए असम नेपाली साहित्य सभा के अध्यक्ष डॉ. चिन्तामणि शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि असम साहित्य सभा ने इस अकादमिक और सांस्कृतिक सम्मेलन का आयोजन कर वृहत्तर असमिया समाज के अभिन्न अंग गोरखा समुदाय को जो पहचान और सम्मान दिया है, उससे वे बेहद आनंदित हैं। उन्होंने कहा कि असम साहित्य सभा द्वारा विभिन्न समुदायों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए उठाए जा रहे कदम आपसी एकता को बढ़ाएंगे और सौहार्द के बंधनों को मजबूत करेंगे, साथ ही उन्होंने असम साहित्य सभा को अपने अभिभावक के समान बताया। इसी विशेष मंच से असम साहित्य सभा द्वारा इस वर्ष का प्रतिष्ठित वासुदेव जालान स्मारक पुरस्कार बी. बरुआ कॉलेज के असमिया विभाग की विभागाध्यक्ष, असमिया व नेपाली भाषा की प्रतिष्ठित लेखिका व शोधकर्ता और असम नेपाली साहित्य सभा की कार्यकारी अध्यक्ष डॉ. इंदुप्रभा देवी को प्रदान किया गया। सम्मान ग्रहण करने के बाद डॉ. इंदुप्रभा देवी ने कहा कि साहित्य सभा की इस मान्यता ने उन्हें क्षेत्र में आगे और अधिक उत्साह के साथ काम करने के लिए प्रेरित किया है।
समारोह के प्रारंभ में असम साहित्य सभा के प्रधान सचिव देवजीत बोरा ने उद्देश्य व्याख्या करते हुए कहा कि संस्था पूर्व में भी राज्य के विभिन्न समुदायों के साथ जुड़कर कई कार्यक्रम आयोजित करती रही है और गोरखा समुदाय को केंद्र में रखकर आयोजित आज का यह सम्मेलन असम में आपसी सद्भाव, भाईचारे और राष्ट्रीय अखंडता का एक उज्ज्वल उदाहरण है। विभिन्न समुदायों के बीच परस्पर सम्मान और सह-अस्तित्व की भावना भाषा, साहित्य और संस्कृति के माध्यम से मजबूत रिश्ते बनाती है, जो नई पीढ़ी को एक साथ मिलकर आगे बढ़ने की प्रेरणा देगी। उन्होंने कहा कि असम के राष्ट्रीय जीवन में विभिन्न समुदायों की भाषा, साहित्य और संस्कृति के बीच एकता को सुदृढ़ करने के लक्ष्य से ही यह आयोजन किया गया है। इस सम्मेलन में असम नेपाली साहित्य सभा के उपाध्यक्ष लीला निरौला, पूर्व अध्यक्ष द्वय नव सपकोटा व दुर्गा खतिवड़ा के साथ-साथ सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी और विशिष्ट साहित्यकार थानेश्वर मालाकार ने विशिष्ट अतिथि के रूप में हिस्सा लिया और अपने विचार रखे। इस अवसर पर तृष्णा देवी, जनकराज उपाध्याय और डी.एन. शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्तियों को सम्मानित भी किया गया। सम्मेलन के दौरान गोरखा समुदाय के पारंपरिक मारुणी नृत्य, करुवा नृत्य और गोरखा लोक नृत्यों की मनमोहक प्रस्तुतियां दी गईं, वहीं स्नेहा सुवेदी ने नेपाली भाषा में सुरीला गीत प्रस्तुत किया।








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