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महिला काव्य मंच, बजाली जिला का प्रतिष्ठा दिवस एवं बहुभाषी काव्य गोष्ठी संपन्न



महिला काव्य मंच, बजाली जिला, असम का प्रतिष्ठा दिवस एवं मासिक बहुभाषी काव्य गोष्ठी अध्यक्ष श्रीमती हीरा देवी के संयोजन एवं संचालन में गत 22 जुलाई, 2026, बुधवार, सायं 7 बजे "कुँहिपाठ जातीय विद्यालय", टिटका (पाठशाला की दक्षिण दिशा में स्थित) में सफलतापूर्वक संपन्न हुई।


मकाम, असम की उपाध्यक्ष श्रीमती गीता देवी की अध्यक्षता में असम के हार्ट थ्रोब जुबिन गर्ग की प्रतिच्छवि के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर तथा 'मायाबिनी' गीत एवं सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। दीप प्रज्ज्वलन कवयित्री नीलिमा शर्मा गोस्वामी द्वारा किया गया।


अध्यक्षा श्रीमती गीता देवी ने अपने संबोधन में सर्वप्रथम महिलाओं के लिए, महिलाओं से तथा महिलाओं के द्वारा गठित अंतरराष्ट्रीय संस्था "महिला काव्य मंच" के संस्थापक, प्रसिद्ध गायक एवं कवि, पटियाला निवासी सेवानिवृत्त आरक्षी अधिकारी डॉ. नरेश नाज़ तथा मकाम की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रभारी, पूर्वोत्तर भारत इकाई, भाषाध्यापिका, अनुवादक व कवयित्री श्रीमती मालविका रायमेधि दास 'मेधा' के मार्गदर्शन हेतु सादर अभिवादन एवं धन्यवाद ज्ञापित किया।


असम के नौ जिलों में मकाम की शाखाओं द्वारा "मन से मंच तक" की इस अनिरुद्ध यात्रा का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि किसी प्रकार के मासिक या वार्षिक अनुदान के बिना मकाम की सदस्याएं प्रत्येक माह अनौपचारिक रूप से बहुभाषी कवि सम्मेलन आयोजित कर विभिन्न स्तर की महिलाओं में काव्यिक एवं बौद्धिक सजगता का विकास करती आ रही हैं।


उन्होंने मकाम, बजाली जिले के वार्षिकोत्सव की सफलता की कामना करते हुए विद्यालय के सत्ताधिकार अध्यापक श्री गौतम कलिता, प्रधान शिक्षक श्री कमल शर्मा तथा विद्यालय के समस्त स्टाफ के सहयोग की सराहना करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया।


विशिष्ट अतिथि मकाम, बरपेटा इकाई की अध्यक्षा श्रीमती प्रभा देवी ने "जननी" नामक हस्तलिखित पत्रिका का विमोचन किया तथा संपादक प्रतिमा बरबरुवा एवं सह-संपादक मरमी दत्त की सराहना करते हुए त्रुटियों की ओर ध्यान आकर्षित कर उनका सुधार किया।


कार्यक्रम में 20 कवियों ने अपनी स्वरचित कविताओं का पाठ किया तथा चार कलाकारों ने गीत प्रस्तुत किए। इसके अतिरिक्त सामूहिक "थियनाम" प्रस्तुत कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई गई।


अध्यक्षा श्रीमती हीरा देवी ने धन्यवाद ज्ञापन किया। असम के जातीय संगीत के गायन के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

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