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असम की पहली असमिया महिला पर्वतारोही एवरेस्ट विजेता रूपामणि गड़ आखिरकार अपने गृह ज़िले लखीमपुर पहुँचीं, विभिन्न संगठनों ने किया भव्य स्वागत



कड़ी मेहनत और अटूट इच्छाशक्ति से जीवन में हर लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसी बात को सच साबित करते हुए विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट फतह कर इतिहास रचने वाली असम की पहली असमिया महिला पर्वतारोही रूपामणि गड़ आखिरकार अपने गृह ज़िले लखीमपुर पहुँचीं। एवरेस्ट विजय के ऐतिहासिक अभियान के बाद अपने जिले में उनके आगमन पर लोगों में अभूतपूर्व उत्साह और खुशी देखने को मिली।


संघर्ष से सफलता की बुलंदियों तक


लखीमपुर जिले के लीलाबाड़ी के निकट स्थित नगांव पाथार गांव के एक साधारण किसान परिवार की बेटी रूपामणि गड़ ने तमाम कठिनाइयों को पार कर यह ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। वर्ष 2020 में उन्होंने भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) में कांस्टेबल के रूप में सेवा शुरू की थी। बाद में वह आईटीबीपी के पहले सर्व-महिला एवरेस्ट अभियान दल की सदस्य बनीं और 21 मई को विश्व की सबसे ऊँची चोटी पर भारत का तिरंगा फहराने में सफल रहीं।

रूपामणि की इस उपलब्धि को महिला सशक्तिकरण और असम के खेल जगत के लिए एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। लखीमपुर पहुँचने पर विभिन्न सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक संगठनों तथा स्थानीय लोगों ने उन्हें फूल, पारंपरिक गामोसा, जापी और चेलेंग चादर भेंट कर भव्य सम्मान दिया।

इस अवसर पर रूपामणि गड़ ने कहा कि "कड़ी मेहनत और आत्मविश्वास से कोई भी कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। असम और लखीमपुर के लोगों ने मुझे जो प्यार और आशीर्वाद दिया है, उसके लिए मैं सदैव आभारी रहूँगी। मुझे विश्वास है कि मेरी यह सफलता देश और असम की हर बेटी और महिला के लिए प्रेरणा बनेगी।"

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय के "नारी शक्ति वंदन" कार्यक्रम के तहत आईटीबीपी की डिप्टी कमांडेंट वनिता तिमुंगपी के नेतृत्व में इस ऐतिहासिक महिला एवरेस्ट अभियान का आयोजन किया गया था। इस दल में रूपामणि गड़ सबसे पहले एवरेस्ट की चोटी पर पहुँची थीं।

एक किसान पिता और आंगनवाड़ी सहायिका माँ की बेटी रूपामणि गड़ ने एवरेस्ट फतह कर यह साबित कर दिया कि यदि मन में दृढ़ संकल्प और अटूट लगन हो, तो गरीबी कभी भी सपनों को साकार करने में बाधा नहीं बन सकती।

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