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चीनी महंगी होने पर गुड़ की ओर बढ़ रहा रुझान, लेकिन क्या वाकई चीनी से ज्यादा सेहतमंद है गुड़?



त्योहारों के मौसम से पहले चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी के बीच कई घरों में रिफाइंड चीनी के विकल्प के तौर पर गुड़ का इस्तेमाल बढ़ सकता है। भारतीय घरों में गुड़ का इस्तेमाल पीढ़ियों से चाय, मिठाइयों और कई पारंपरिक व्यंजनों में किया जाता रहा है। लेकिन क्या गुड़ वास्तव में चीनी से ज्यादा स्वस्थ विकल्प है? इसका जवाब सिर्फ किसी एक को बेहतर बताने जितना आसान नहीं है।


गुड़ और सफेद चीनी दोनों ही शुगर के स्रोत हैं। मुख्य अंतर यह है कि गुड़ कम रिफाइंड होता है और इसमें गन्ने से मिलने वाले कुछ खनिज और अन्य यौगिक थोड़ी मात्रा में मौजूद रह सकते हैं। दूसरी ओर, सफेद चीनी को अधिक रिफाइन किया जाता है और इसमें शुगर के अलावा पोषण संबंधी लाभ बहुत कम होते हैं।


गुड़ में आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम और मैग्नीशियम जैसे खनिज थोड़ी मात्रा में पाए जा सकते हैं। इस लिहाज से इसमें रिफाइंड चीनी की तुलना में कुछ पोषण संबंधी लाभ हो सकते हैं। हालांकि, इन खनिजों की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, इसलिए गुड़ को आवश्यक पोषक तत्वों का प्रमुख स्रोत नहीं माना जाना चाहिए।


भारत के कई हिस्सों में भोजन के बाद गुड़ खाने की पारंपरिक आदत भी रही है। आमतौर पर इसे पाचन में मददगार माना जाता है, लेकिन इसे पाचन संबंधी समस्याओं का इलाज नहीं समझना चाहिए।


गुड़ की लोकप्रियता का एक कारण इसका अलग स्वाद और खुशबू भी है। इसका इस्तेमाल लड्डू, चिक्की, पारंपरिक मिठाइयों और कई क्षेत्रीय व्यंजनों में किया जाता है। चूंकि इसमें शुगर की मात्रा अधिक होती है, इसलिए यह शरीर को तुरंत ऊर्जा भी प्रदान कर सकता है।


क्या डायबिटीज में चीनी की जगह गुड़ ले सकते हैं?


यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। गुड़ शुगर-फ्री या लो-शुगर खाद्य पदार्थ नहीं है। डायबिटीज या ब्लड शुगर से जुड़ी चिंता वाले लोगों को चीनी की जगह गुड़ को बिना मात्रा नियंत्रित किए नहीं लेना चाहिए। शरीर में जाने वाली कुल शुगर की मात्रा महत्वपूर्ण होती है।


वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोगों पर भी यही बात लागू होती है। केवल सफेद चीनी की जगह गुड़ इस्तेमाल करने से डाइट अपने आप ज्यादा स्वस्थ नहीं हो जाती। दोनों का अधिक सेवन कैलोरी की मात्रा बढ़ा सकता है और वजन बढ़ने के साथ-साथ दांतों से जुड़ी समस्याओं का खतरा भी बढ़ा सकता है।


विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, रोजाना भोजन से मिलने वाली ऊर्जा में फ्री शुगर की मात्रा 10 प्रतिशत से कम रखना चाहिए। इसे घटाकर 5 प्रतिशत तक करने पर अतिरिक्त स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं।


तो गुड़ बेहतर है या चीनी?


गुड़ को उसके स्वाद और कम रिफाइंड होने के कारण चीनी के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे भी सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए। स्वास्थ्य के लिहाज से बड़ा लक्ष्य केवल चीनी को गुड़ से बदलना नहीं, बल्कि भोजन में शामिल कुल अतिरिक्त और फ्री शुगर की मात्रा को कम करना होना चाहिए।


रोजमर्रा की सेहत के लिए सब्जियां, फल, दालें, साबुत अनाज, मेवे और अन्य पोषक खाद्य पदार्थों से भरपूर संतुलित आहार, चीनी की जगह गुड़ चुनने से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है।


सीधी बात: गुड़ में रिफाइंड चीनी की तुलना में कुछ पोषण संबंधी फायदे हो सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि इसे ज्यादा मात्रा में खाया जाए। चीनी हो या गुड़—दोनों के सेवन में संयम जरूरी है।

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