पति-पत्नी के बीच छोटी-छोटी बातों पर बहस होना आज सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि घर में बिना किसी बड़े कारण के लगातार तनाव, चिड़चिड़ापन, संवाद की कमी और रिश्तों में दूरी बढ़ती जा रही हो, तो वास्तुशास्त्र इसे केवल स्वभाव का नहीं, बल्कि घर की ऊर्जा का भी विषय मानता है। राजवल्लभ, 45 देवता मंडल और अन्य पारंपरिक वास्तु ग्रंथों में ऐसे कई स्थानों का उल्लेख मिलता है, जिनका संबंध परिवार की शांति और आपसी सामंजस्य से जोड़ा गया है। यदि आप भी घर का वातावरण अधिक शांत और प्रेमपूर्ण बनाना चाहते हैं, तो इन बातों पर विशेष ध्यान दें।
1. घर का ब्रह्मस्थान हमेशा खुला और हल्का रखें
वास्तु ग्रंथों में ब्रह्मस्थान को पूरे घर की ऊर्जा का केंद्र माना गया है। यदि इस स्थान पर भारी फर्नीचर, सीढ़ी, स्टोर, खंभा या अनावश्यक सामान रखा हो, तो सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बाधित माना जाता है। ब्रह्मस्थान को साफ, खुला और हल्के रंगों जैसे सफेद, क्रीम या हल्के पीले रंग में रखना मानसिक शांति और सही निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाने वाला बताया गया है।
2. दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) को गंदा न रहने दें
यदि घर में सबसे अधिक ध्यान किसी दिशा पर देने की आवश्यकता है, तो वह दक्षिण-पूर्व है। वास्तु ग्रंथों के अनुसार यह अग्नि का क्षेत्र है और यहीं की अव्यवस्था घर में अनावश्यक क्रोध और विवाद का कारण बन सकती है। इस भाग में जूठे बर्तन लंबे समय तक न रखें, कूड़ा न जमा होने दें, टूटी वस्तुएं या कबाड़ न रखें। यह स्थान हमेशा साफ, सुंदर और व्यवस्थित होना चाहिए।
3. शयनकक्ष में बिस्तर के नीचे सामान रखने से बचें
आजकल स्टोरेज बेड आम हो गए हैं, लेकिन पारंपरिक वास्तु ग्रंथ इसके विपरीत सलाह देते हैं। बिस्तर के नीचे बंद सामान, पुराने कपड़े या बेकार वस्तुएं रखने से विश्राम और मानसिक शांति प्रभावित होती है। साथ ही, दंपति को सिर दक्षिण या पूर्व दिशा की ओर करके सोने की सलाह दी गई है और बिस्तर के ठीक सामने दर्पण लगाने से भी बचने को कहा गया है।
4. घर में हवा और प्राकृतिक रोशनी का पर्याप्त प्रवेश होने दें
वास्तु साहित्य में बार-बार इस बात पर जोर दिया गया है कि घर के प्रत्येक कमरे में पर्याप्त वेंटिलेशन होना चाहिए। यदि किसी कमरे में केवल एक ही खिड़की हो, तो एग्जॉस्ट फैन लगाने की भी सलाह दी गई है। बंद और घुटन वाले वातावरण की तुलना में खुला, हवादार और रोशनी वाला घर मन को अधिक शांत रखने वाला माना गया है।
5. दीवारों की दरारें और टूटी चीजें तुरंत ठीक करवाएं
मुख्य द्वार, शयनकक्ष या घर की दीवारों पर दरारें, उखड़ा हुआ पेंट और टूट-फूट वास्तु में शुभ नहीं मानी गई है। विशेष रूप से पूर्व दिशा, पश्चिम दिशा और घर के मध्य भाग में किसी भी प्रकार की क्षति को जल्द से जल्द ठीक करने की सलाह दी गई है। साफ-सुथरा और व्यवस्थित घर सकारात्मक वातावरण बनाने में सहायक माना गया है।
6. रंगों का चुनाव सोच-समझकर करें
वास्तु ग्रंथों में पूरे घर में काले, गहरे नीले और धूसर रंगों के अत्यधिक प्रयोग से बचने की सलाह दी गई है। इसके स्थान पर सफेद, क्रीम, हल्का पीला और हल्के पेस्टल रंगों को शांति और सौम्यता बढ़ाने वाला माना गया है। वहीं, अत्यधिक लाल, नारंगी या गहरे गुलाबी रंगों का अधिक उपयोग घर में उग्रता बढ़ाने वाला माना गया है।
7. मुख्य द्वार और प्रवेश क्षेत्र को हमेशा स्वागतयोग्य रखें
मुख्य द्वार को घर में ऊर्जा के प्रवेश का माध्यम माना गया है। इसलिए यहां टूटे हुए सजावटी सामान, सूखी माला, कूड़ादान या बिखरे हुए जूते-चप्पल नहीं होने चाहिए। प्रवेश स्थान जितना साफ, व्यवस्थित और आकर्षक होगा, घर का वातावरण उतना ही सकारात्मक माना गया है।
निष्कर्ष
हर रिश्ते को समय, समझ और प्रयास की आवश्यकता होती है। वास्तुशास्त्र इन मानवीय मूल्यों का विकल्प नहीं है, बल्कि ऐसा वातावरण बनाने का प्रयास है जहां प्रेम, सम्मान और संवाद स्वाभाविक रूप से पनप सकें। यदि घर की ऊर्जा संतुलित हो और परिवार के सदस्य एक-दूसरे के लिए समय निकालें, तो दांपत्य जीवन में सुख, शांति और सामंजस्य बनाए रखना कहीं अधिक आसान हो सकता है।
रिपोर्ट: देवकी नंदन देवड़ा
मो. 9377607101










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