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रोहा में राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर तीन दिवसीय क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन एवं जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ



रोहा, राष्ट्रीय हथकरघा दिवस के अवसर पर रोहा में भी पूरे उत्साह के साथ कार्यक्रम आयोजित किया गया। भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के तत्वावधान तथा स्थानीय शिल्पकारों के सहयोग से रोहा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में तीन दिवसीय क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन एवं जागरूकता कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।


कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में पारंपरिक हस्तशिल्प एवं शिल्पकला के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा असम की समृद्ध शिल्प एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देना है। इस अवसर पर कार्बी एवं तिवा जनजातीय परिधानों, बांस शिल्प, असमिया आभूषण तथा मृद्शिल्प से संबंधित सामग्रियों की प्रदर्शनी लगाई गई।


स्थानीय शिल्पकारों ने विद्यार्थियों के समक्ष विभिन्न हस्तशिल्प कलाओं का जीवंत प्रदर्शन करते हुए उनकी निर्माण प्रक्रिया की जानकारी दी। उन्होंने पारंपरिक शिल्पकला के महत्व, उसके संरक्षण एवं विकास तथा हस्तशिल्प के माध्यम से स्वरोजगार और आत्मनिर्भरता की संभावनाओं पर भी विस्तार से प्रकाश डाला।


कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में विद्यार्थियों ने आकर्षक लोकनृत्य प्रस्तुत कर उपस्थित अतिथियों का मन मोह लिया।


समारोह में भारत सरकार के हस्तकरघा एवं वस्त्र विभाग के सहायक निदेशक शशिकांत गुप्ता, असम सरकार के वस्त्र विभाग के उपनिदेशक प्रशांत रंगपी, रोहा उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्राचार्य प्रभात चंद्र नाथ तथा हस्तशिल्प विभाग के वरिष्ठ अधिकारी बी. मुसाहारी सहित अन्य अधिकारियों ने विद्यार्थियों को संबोधित किया।


इस अवसर पर सुनाली टेरोंपी एवं पपी कोंवर ने विभिन्न पारंपरिक हस्तशिल्पों का प्रदर्शन कर विद्यार्थियों को उनकी विशेषताओं से अवगत कराया।


कार्यक्रम में बांस एवं बेंत शिल्पकार मुकेश सैकिया, नंदिता पातर, राजीव सैकिया, जयंत दास, रूपज्योति डेका, ओमप्रकाश सैकिया, राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिल्पकार सवीना टेरोंपी तथा शशिकला हनसीपी सहित अनेक शिल्पकार उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों को हस्तशिल्प एवं बांस-बेंत शिल्प की परंपरा, तकनीक और महत्व की जानकारी दी।


तीन दिवसीय इस कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को स्थानीय कला एवं शिल्प परंपराओं से जोड़ने तथा उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।

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