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वास्तु के अनुसार जानिए, घर की किस दिशा में कौन-सा कमरा होना चाहिए

 


घर बनाते समय हम अक्सर पूछते हैं—रसोई किस दिशा में होनी चाहिए, बेडरूम कहां होना चाहिए या पूजा घर किस तरफ होना चाहिए? लेकिन वास्तु की पारंपरिक पद-विन्यास पद्धति में सवाल इससे थोड़ा आगे जाता है।


सिर्फ दिशा सही होना पर्याप्त नहीं माना जाता। उस दिशा में कौन-सा काम हो रहा है और उस काम के लिए उस दिशा का कौन-सा पद चुना गया है, यह भी देखा जाता है। उपलब्ध वास्तु सामग्री में घर के साथ-साथ ऑफिस में भी व्यक्ति के काम के अनुसार बैठने की जगह निर्धारित की गई है।


इसका सबसे उपयोगी हिस्सा यह है कि इसके लिए नया घर बनाना जरूरी नहीं। कई बातें ऐसी हैं जिन्हें मौजूदा घर में भी जांचा और सुधारा जा सकता है।


सबसे पहले घर के बीच में जाकर देखें

घर के बीच का हिस्सा यानी ब्रह्मस्थान सबसे पहले जांचने वाली जगह है। उपलब्ध वास्तु निर्देशों में इसे पिलर, बीम, टॉयलेट, सीढ़ी, भारी सामान और मशीनरी जैसी चीजों से मुक्त रखने की सलाह दी गई है। इसे ऊर्जा के केंद्रीय क्षेत्र के रूप में देखा गया है।

इसलिए आज ही घर के बीच में खड़े होकर देखें—क्या वहां भारी सोफा, सामान का ढेर, सीढ़ी, स्टोरेज या कोई अनावश्यक संरचना तो नहीं है?

अगर है, तो पहला सुधार यहीं से शुरू किया जा सकता है।

सामग्री में ब्रह्मस्थान को अपेक्षाकृत खुला रखने और हल्के फर्नीचर की अनुमति का उल्लेख है।


पूजा घर है तो सिर्फ ईशान देखकर काम पूरा न मानें

पूजा के लिए उत्तर-पूर्व यानी ईशान क्षेत्र को प्राथमिकता दी गई है। मंदिर को ईश या अदिति पद में रखने तथा पूर्व की दीवार को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। पूजा पूर्व या पश्चिम की ओर मुख करके करने का निर्देश भी दिया गया है।

इसलिए घर में पूजा स्थान की जांच करते समय तीन चीजें देखें—पहली, वह उत्तर-पूर्व या बताए गए उपयुक्त पद में है या नहीं। दूसरी, पूजा करते समय आपका मुख किस दिशा में रहता है। तीसरी, मंदिर के आसपास अनावश्यक सामान तो नहीं जमा है।

यानी केवल “मंदिर ईशान में है” कहकर रुकना नहीं है।


रसोई में सबसे पहले चूल्हा और हवा देखें

दक्षिण-पूर्व को रसोई के लिए प्रमुख स्थान बताया गया है। लेकिन असली उपयोगी बात उसके बाद आती है।

सामग्री के अनुसार अग्नि क्षेत्र लगभग 123.75 से 146.25 डिग्री के बीच माना गया है। बर्नर को अग्नि या अंतरिक्ष पद में रखने, खिड़की के पास रखने और रसोई में एग्जॉस्ट की व्यवस्था रखने की सलाह दी गई है। अग्नि क्षेत्र में पानी न रखने और दक्षिण-पूर्व को साफ-सुथरा रखने की बात भी कही गई है।

आज ही अपनी रसोई में तीन चीजें देखें—चूल्हा कहां है? हवा बाहर निकलने का रास्ता है या नहीं? क्या दक्षिण-पूर्व में जूठे बर्तन, कचरा या अनावश्यक सामान जमा रहता है?

सिर्फ चूल्हा गलत जगह होना ही मुद्दा नहीं है; हवादार और साफ रसोई भी इस व्यवस्था का हिस्सा है।


बेडरूम में सबसे बड़ा बदलाव बेड से शुरू हो सकता है

बेडरूम के मामले में सामग्री कई बहुत व्यावहारिक बातें बताती है। सोते समय सिर दक्षिण या पूर्व की ओर रखने की सलाह दी गई है। बेड को नाग, रोग, शोष और अशुर जैसे बताए गए पदों पर न रखने तथा मर्म स्थान पर न रखने की बात कही गई है।

इसके अलावा बिस्तर के नीचे स्टोरेज न रखने, बेड को उत्तर की दीवार के बिल्कुल पास न रखने और बेड के सामने आईना न रखने की सलाह दी गई है। बेड के नीचे जगह खुली रखने तथा कमरे में हवा का उचित प्रवाह रखने पर भी जोर है।

इसका मतलब यह हुआ कि पाठक आज रात ही अपना बेड चेक कर सकता है।

क्या सिर दक्षिण या पूर्व की तरफ है? क्या बेड के नीचे पुराने कपड़े, सामान या स्टोरेज भरा है? क्या सामने आईना है? क्या बेड के ऊपर बीम है? क्या कमरे में हवा का पर्याप्त रास्ता है?

इन सवालों के जवाब से पाठक को तुरंत कुछ सुधार करने का मौका मिलता है।


बच्चों की पढ़ाई में दिशा के साथ टेबल भी देखें

स्टडी रूम के लिए उत्तर और पूर्व के कई पद बताए गए हैं। विशेष रूप से पढ़ते समय पूर्व की ओर मुख करना अच्छा बताया गया है। स्टडी टेबल के लिए सीधा और बिना टूटे-फूटे डिजाइन वाला टेबल टॉप तथा लकड़ी के टेबल का उल्लेख मिलता है।

इसलिए अगर बच्चा पढ़ाई में ध्यान नहीं लगा पा रहा है, तो केवल कमरा बदलने के बजाय पहले देखें कि उसकी स्टडी टेबल किस दिशा में है और बच्चा बैठकर किस ओर देख रहा है।


एक छोटा बदलाव—टेबल की दिशा बदलना—पूरे कमरे को बदलने से कहीं आसान है।

ऑफिस में पद से ज्यादा काम को समझें

वास्तु की यह पद्धति घर तक सीमित नहीं है। ऑफिस में भी व्यक्ति के काम के अनुसार स्थान बताया गया है।

मुख्य अकाउंटेंट के लिए सावित्र या सावित्री क्षेत्र, मार्केटिंग के लिए रुद्र और रुद्रजय, रिसेप्शन के लिए आप और आपवत्स, आर्किटेक्ट के लिए भूधर या भल्लाट, संगठन के प्रमुख के लिए इंद्र या इंद्रजय और गहन विश्लेषण या रिसर्च के लिए बृहंश तथा अग्नि पद का उल्लेख मिलता है।

यानी अगर घर में कोई व्यक्ति वर्क फ्रॉम होम करता है, तो उसके लिए भी यही सवाल उपयोगी हो सकता है—वह क्या काम करता है और वह बैठता कहां है?

अकाउंटेंट, मार्केटिंग व्यक्ति और कंपनी के मालिक के लिए एक ही सीट को आदर्श मानना इस पद-विन्यास के अनुसार सही दृष्टिकोण नहीं होगा।


घर की हवा को नजरअंदाज न करें

यह शायद इस पूरे लेख की सबसे व्यावहारिक बात है।

वास्तु सामग्री में बार-बार प्राकृतिक रोशनी और उचित वेंटिलेशन पर जोर दिया गया है। यदि किसी कमरे में केवल एक खिड़की हो तो एग्जॉस्ट की व्यवस्था करने का सुझाव भी दिया गया है।

इसलिए पाठक आज ही हर कमरे में जाकर देख सकता है—क्या खिड़कियां वास्तव में खुलती हैं? क्या हवा एक तरफ से आकर दूसरी तरफ निकल सकती है? क्या कमरे में प्राकृतिक रोशनी आती है? क्या कोई खिड़की हमेशा सामान से बंद रहती है?

वास्तु की बात हो या सामान्य रहने की गुणवत्ता की—हवा और रोशनी को नजरअंदाज करना समझदारी नहीं है।


टूटे हुए घर को सिर्फ सजाकर न छोड़ें

सामग्री में घर में दरार, टूट-फूट, पानी का रिसाव और खराब संरचनात्मक स्थिति को ठीक करने पर जोर दिया गया है। मुख्य प्रवेश द्वार पर भी दरार, गंदगी या खराब संरचना को तुरंत ठीक करने की बात कही गई है।

इसलिए घर का एक छोटा “वास्तु निरीक्षण” करें।

दीवारों में दरार है? फर्श या टाइल टूटी है? पानी रिस रहा है? मुख्य दरवाजे के सामने कोई बड़ा अवरोध है? घर के बीच में सामान जमा है?

पहले वास्तविक समस्या ठीक करें, फिर सजावट और उपायों की ओर जाएं।


तिजोरी है तो सिर्फ पैसा रखना ही काफी नहीं

तिजोरी के लिए उत्तर के सोम, वल्लाट, मुख्य और भूधर तथा पूर्व में जयंत या आर्यमा जैसे पदों का उल्लेख मिलता है। तिजोरी का मुंह पहले उत्तर और उसके बाद पूर्व की ओर रखने की सलाह दी गई है। उसके आसपास कचरा, अव्यवस्था या अनावश्यक इलेक्ट्रॉनिक सामान न रखने की बात भी कही गई है।

इसलिए तिजोरी रखने वालों के लिए सबसे आसान जांच है—तिजोरी का दरवाजा किस ओर खुल रहा है और उसके आसपास क्या रखा है?

और अंत में—घर को एक दिन में बदलने की जरूरत नहीं

वास्तु को लेकर सबसे बड़ी गलती यह हो सकती है कि हर समस्या का समाधान तुरंत तोड़फोड़ या बड़े खर्च में खोजा जाए।

पहले घर का निरीक्षण करें। ब्रह्मस्थान खाली है या नहीं। रसोई में अग्नि और वेंटिलेशन की स्थिति क्या है। बेड किस दिशा में है और उसके नीचे क्या रखा है। स्टडी टेबल किस ओर है। तिजोरी किस ओर खुलती है। मुख्य द्वार के सामने कोई अवरोध या टूट-फूट है या नहीं। घर में हवा और प्राकृतिक रोशनी पर्याप्त है या नहीं।

इनमें से जो चीज बिना तोड़फोड़ के बदली जा सकती है, उसे पहले बदलें।

क्योंकि वास्तु की उपयोगिता तभी है जब वह घर देखने के बाद कोई वास्तविक निर्णय लेने में मदद करे। सिर्फ यह जान लेना कि “ईशान पूजा के लिए और आग्नेय रसोई के लिए है” जानकारी है; लेकिन यह जानना कि अपने घर में आज कौन-सी पांच चीजें जांचनी हैं और कौन-सी चीज पहले सुधारनी है—यही उपयोगी जानकारी है।

स्रोत: उपलब्ध राजवल्लभ, वास्तु-पदविन्यास एवं वास्तु प्लानिंग सामग्री।


रिपोर्ट: देवकी नंदन देवड़ा

मो. 9377607101


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