भव्य दरबार सजा, जोत प्रज्वलित कर श्रद्धालुओं ने लिया गोगा जी महाराज का आशीर्वाद
गुवाहाटी-- जाहरवीर गोगा सत्संग समिति, गुवाहाटी के सौजन्य से छत्रीबाड़ी स्थित परशुराम सेवा सदन में श्रद्धा एवं भक्ति के वातावरण में गोगा नवमी उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर जाहरवीर गोगा जी महाराज के दरबार में पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि एवं परिवार की मंगलकामना की।
उत्सव के अवसर पर जाहरवीर गोगा जी महाराज का भव्य एवं आकर्षक दरबार सजाया गया। दरबार में गुरु गोरखनाथ जी, माता बाच्छल, गोगा पीर की धर्मपत्नी माता सूर्यल शक्ति, नरसिंह पांडे तथा गुरुदेव आशा दास जी महाराज सहित छह विभूतियों के दीपक प्रज्वलित कर विधिवत जोत प्रज्वलित की गई। इसके बाद श्रद्धालुओं ने दर्शन कर पूजा-अर्चना की और गोगा जी महाराज का आशीर्वाद प्राप्त किया।
श्रद्धालुओं को दर्शन के पश्चात गोगा जी महाराज का रक्षा सूत्र ‘तांती’ बांधा गया तथा भभूत प्रदान की गई। लोक परंपरा के अनुसार रक्षाबंधन के अवसर पर हाथों में बांधी गई राखियों को खोलकर गोगा जी महाराज के चरणों में अर्पित किया गया। इस दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह एवं आस्था देखने को मिली।
गोगाजी के परम भक्त पवन शर्मा इन्टोदिया ने गोगा जी महाराज की महिमा एवं ऐतिहासिक परंपरा पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राजस्थान के चूरू जिले के ददरेवा नामक स्थान पर राजपूत घराने में सातवीं शताब्दी में भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अष्टमी को जाहरवीर गोगा जी महाराज का जन्म हुआ था। मान्यता है कि उनका अवतरण गुरु गोरखनाथ जी के आशीर्वाद से हुआ था। लोक आस्था में उन्हें सांपों के राजा के रूप में भी पूजा जाता है।
उन्होंने बताया कि गोगा जी महाराज को लेकर अनेक लोक मान्यताएं एवं चमत्कारिक कथाएं प्रचलित हैं। विशेष रूप से सर्पदंश से मुक्ति दिलाने वाले देवता के रूप में उनकी व्यापक श्रद्धा है। राजस्थान सहित देश के विभिन्न क्षेत्रों में आज भी लोग गोगा जी महाराज की पूजा-अर्चना करते हैं और उनसे परिवार की रक्षा की प्रार्थना करते हैं।
उन्होंने बताया कि राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में गोगामेड़ी रेलवे स्टेशन के निकट गोगा जी महाराज का प्रमुख समाधि स्थल स्थित है। यहां भाद्रपद मास में एक माह तक विशाल मेले का आयोजन होता है, जिसमें राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से श्रद्धालु पहुंचते हैं। गोगा जी महाराज को हिंदू-मुस्लिम एकता और सामाजिक सद्भाव का प्रतीक भी माना जाता है। उनके प्रति विभिन्न समुदायों के लोगों में समान रूप से श्रद्धा और आस्था देखने को मिलती है।
गोगा नवमी के अवसर पर शाम को भजन संध्या का भी आयोजन किया गया। स्थानीय कलाकार जरनैल सिंह, विनोद शर्मा, कैलाश शर्मा एवं अन्य गायकों ने एक से बढ़कर एक भजनों की प्रस्तुतियां देकर वातावरण को भक्तिमय बना दिया। भजनों पर श्रद्धालु भाव-विभोर होकर झूमते नजर आए। देर शाम तक चले इस धार्मिक आयोजन के पश्चात श्रद्धालुओं के लिए महाप्रसाद की व्यवस्था की गई।
गोगा नवमी उत्सव ने धार्मिक आस्था के साथ-साथ लोक परंपरा, सामाजिक सद्भाव और सांस्कृतिक विरासत की भावना को भी मजबूत किया। आयोजन के दौरान श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह रहा और पूरा परशुराम सेवा सदन गोगा जी महाराज के जयकारों एवं भजनों से गूंजायमान रहा।










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